योग दिवस और अन्य आयोजनों के नाम पर जारी हुए लाखों के चेक — रिकॉर्ड और दस्तावेज़ लापता, सूचना अधिकारी ने खुद लिखा “सूचना छिपाई जा रही है”। आयोग के अंदर जांच और विशेष ऑडिट की मांग।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य योग आयोग के भीतर वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों का मामला अब सुर्खियों में आ गया है।
सचिव राज्य योग आयोग के आंतरिक दस्तावेज़ों और पत्राचार से बड़ा खुलासा हुआ है कि 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और अन्य आयोजनों के नाम पर लाखों रुपये के चेक बिना विधिवत अनुमति और लेखा अभिलेख के जारी किए गए, जबकि संबंधित नस्तियाँ और भुगतान से जुड़े दस्तावेज़ कार्यालय से गायब हैं।
अपुष्ट सूत्रों से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, आयोग के तत्कालीन सहायक वर्ग-03 महेन्द्र सिंह द्वारा 21 मई 2025 को लिखे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कार्यालय की कोई भी नस्ती उनके संरक्षण में नहीं है, और कई जरूरी फाइलें — जैसे भण्डार पंजी, आवेदन-पत्र, योग दिवस आयोजन से जुड़ी नस्तियाँ — कर्मचारियों द्वारा अपने पास रख ली गई हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि “इन नस्तियों की मांग करने पर भी कार्यालयीन कर्मियों द्वारा जानकारी नहीं दी जा रही है।”
इसी के बाद आयोग के जनसंपर्क अधिकारी रविकांत कुमार ने 4 जुलाई 2025 को सचिव को भेजे पत्र में लिखा कि, “जब भी कार्यालयीन फाइलें मांगी जाती हैं, तो कहा जाता है कि उपलब्ध नहीं हैं या अधूरी हैं, और जानकारी देने से मना कर दिया जाता है।
ऐसी स्थिति में सूचना आयोग में जाने की विवशता हो रही है।”
अध्यक्ष महोदय द्वारा कि जा रही गंभीर वित्तीय अनियमितता :
प्राप्त बैंक स्टेटमेंट और आयोग की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, नीचे दिए गए चेक 6 मार्च से 10 मार्च 2025 के बीच जारी किए गए —
क्रम विषय चेक नंबर/दिनांक राशि (₹)
1 योग सामग्री क्रय संबंधी जिला जशपुर 173028 / 06.03.2025 – 76,95,000/-
2 . योग दिवस हेतु विज्ञापन संबंधी 173040 / 10.03.2025 – 20,00,000/-
3 . योग दिवस हेतु ब्रांडिंग कार्य 173041 / 10.03.2025 –
49,99,000/-
4 .होली समारोह भुगतान 173047 / 13.03.2025 –
49,500/-
इन चेकों को संयुक्त हस्ताक्षर के साथ जारी किया गया, परन्तु ऑडिट रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि किसके अनुमोदन से यह भुगतान किया गया?
जबकि आयोग के नियमों के अनुसार ₹1 लाख से अधिक राशि के आहरण के लिए अध्यक्ष एवं सचिव की संयुक्त स्वीकृति आवश्यक है।
अध्यक्ष महोदय योग आयोग कि संदेहास्पद भूमिका और जांच की मांग:
दस्तावेज़ बताते हैं कि सहायक लेखाधिकारी व लिपिक स्तर पर हस्ताक्षर कर बैंक से भारी भरकम राशि निकाली गई, और नस्तियाँ अब गायब हैं। इस पूरे मामले पर आयोग के अंदर ही “अनियमितताओं की सूचना एवं विशेष ऑडिट कराने” के आदेश जारी किए गए हैं।
आयोग के निवर्तमान सचिव द्वारा 30 सितंबर 2025 को जारी पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि —
“कार्यालयीन फाइलों का नियंत्रण, चेक रजिस्टर और बैंक विवरण की प्रतिलिपि संलग्न कर ऑडिट हेतु प्रस्तुत किया जा रहा है।”
अंदरखाने मचा हड़कंप:
इन पत्रों के सामने आने के बाद अब वित्त विभाग और समाज कल्याण विभाग भी सक्रिय हो गया है। आयोग के भीतर उच्च स्तरीय जांच और विशेष ऑडिट की तैयारी चल रही है। सूत्रों का कहना है कि कई अधिकारियों और कर्मचारियों के हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे हैं, जिससे धोखाधड़ी और फर्जी भुगतान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अध्यक्ष महोदय द्वारा संभावित गबन की आशंका:
योग आयोग के फंड से निकली करोड़ों की राशि और गायब फाइलों का सिलसिला इस बात की ओर संकेत कर रहा है कि कहीं “योग दिवस” का फंड गबन का जरिया तो नहीं बना?
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में संचालनालय स्तर पर विशेष ऑडिट और सतर्कता जांच की अनुशंसा की जा रही है।
बरहाल छत्तीसगढ़ योग आयोग में सामने आए ये दस्तावेज़ अब राज्य प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि “सूचना छिपाने, फाइलें गायब करने और फर्जी भुगतान” का भी हो सकता है।
राज्य सरकार ने यदि त्वरित जांच नहीं की, तो आने वाले दिनों में यह एक बड़ा घोटाला बन सकता है।




