Thursday, January 15, 2026

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 – राजनीतिक समीकरणों का महायुद्ध शुरू

खबर आलोक स्पेशल रिपोर्ट – टीम बिहार रवाना

संदीप सिंह,बिहार। 2020 से 2025 तक — बिहार की राजनीति का सफ़र।

बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर आगामी चुनाव का बिगुल बज चुका है। 2020 में हुए पिछले चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को 125 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि महागठबंधन (RJD–कांग्रेस–वाम दल) को 110 सीटें हासिल हुई थीं। उस चुनाव में राजद (RJD) ने 75, भाजपा (BJP) ने 74, जदयू (JD-U) ने 43 और कांग्रेस ने 19 सीटों पर कब्जा जमाया था।

बाद के वर्षों में बिहार की राजनीति में कई उलटफेर हुए — कभी नीतीश कुमार ने NDA छोड़ा तो कभी दोबारा लौट आए। इसी राजनीतिक अस्थिरता ने 2025 के चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।

क्षेत्रवार राजनीतिक माहौल — जनता की नब्ज़ क्या कहती है

  • उत्तर बिहार (दरभंगा, सीतामढ़ी, मधुबनी): मैथिल और यादव वोट बैंक अब भी निर्णायक। BJP और RJD दोनों ने यहां अपने दांव गहरे लगाए हैं।
  • मगध और नालंदा क्षेत्र: विकास, शिक्षा और किसान मुद्दों पर जनता की सीधी राय बंटी हुई है।
  • सीमांचल (कटिहार, किशनगंज): मुस्लिम वोटरों के झुकाव पर हर पार्टी की निगाह।
  • पश्चिम बिहार (भोजपुर, रोहतास, सारण): जातिगत समीकरणों के साथ अपराध और विकास दोनो अहम मुद्दे बने हुए हैं।

गठबंधन और सीट बंटवारा – 2025 की चुनावी तस्वीर

  • इस बार NDA और INDIA गठबंधन (महागठबंधन) दोनों ने सीटों के फॉर्मूले को लगभग तय कर लिया है।
  • NDA में भाजपा और जदयू लगभग 101-101 सीटों पर लड़ेंगे,
    वहीं एलजेपी (चिराग पासवान) को करीब 28-30 सीटें और हम (जीतनराम मांझी) को 6 सीटें दी गई हैं।
  • महागठबंधन (INDIA) में राजद सबसे बड़ा घटक है, जबकि कांग्रेस को 2020 के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद इस बार भी उचित हिस्सेदारी दी गई है।
  • सीट बंटवारे के बाद दोनों गठबंधनों में टिकट वितरण को लेकर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं — जिससे कई जगह पर “बाग़ी उम्मीदवार” मैदान में उतर सकते हैं।

नया खिलाड़ी – प्रशांत किशोर और जनसुराज पार्टी

देश के चर्चित पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट प्रशांत किशोर (PK) अब मैदान में खुद खिलाड़ी बन चुके हैं।
उन्होंने ‘जनसुराज पार्टी’ (Jan Suraaj) का गठन कर तीन वर्षों से लगातार बिहार के गांव-गांव में पैदल यात्रा और जनसंवाद कर रहे हैं।
PK की पार्टी विकास, पारदर्शिता और स्थानीय नेतृत्व के मुद्दे उठा रही है।
युवा वर्ग और शहरी वोटरों के बीच उनकी पकड़ धीरे-धीरे मजबूत होती दिख रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि PK की पार्टी भले बड़े पैमाने पर सीटें न जीत पाए, लेकिन कई सीटों पर वोट विभाजन कर चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बनेगा दावेदार?

सर्वे और जनराय के अनुसार, तेजस्वी यादव इस समय बिहार के सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री चेहरा बने हुए हैं।
हालांकि नीतीश कुमार का अनुभव और संगठनात्मक पकड़ अब भी NDA के लिए मुख्य ताकत बनी हुई है।
वहीं चिराग पासवान भी NDA में “युवा चेहरा” के रूप में उभरने की कोशिश में हैं।
कांग्रेस पिछले चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद इस बार पुनरुद्धार की राह पर है — पर ज़मीन पर चुनौती बड़ी है।

राष्ट्रीय राजनीति पर असर

बिहार का चुनाव सिर्फ राज्य की नहीं बल्कि देश की राजनीति का दिशा-सूचक माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार वर्तमान में कई क्षेत्रीय सहयोगियों — नीतीश कुमार (बिहार) और चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश) — की समर्थन पर टिकी है।
यदि बिहार में समीकरण उलटते हैं, तो इसका सीधा असर दिल्ली की सत्ता तक देखने को मिलेगा।

चुनावी मैदान में उतरा ‘खबर आलोक’

बिहार चुनाव की हर नब्ज़ पर नज़र रखने के लिए
“खबर आलोक” की विशेष टीम बिहार रवाना हो चुकी है।
रिपोर्टर संदीप सिंह के नेतृत्व में “खबर आलोक” लगातार ज़मीनी हकीकतों और राजनीतिक हलचलों पर रिपोर्टिंग करेगा।
हमारा उद्देश्य है — जनता तक सटीक, निर्भीक और असरदार चुनावी खबरें पहुँचाना।

खबर आलोक — सच्ची पत्रकारिता की दिशा में एक और कदम।
रिपोर्टिंग टीम बिहार में सक्रिय – पटना, दरभंगा, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और सहरसा सर्किट से लाइव अपडेट जारी रहेंगे।


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