शहर का एक ऐसा वार्ड है बरेठपारा, जो अपराध,सुखा,गीला नशा और सट्टा,जुआ और अपराधियों को शरण देने का हब बन चुका है

  • ऐ सब इस वार्डवासियों के आंखों के निचे हो रहा है, लेकिन वार्डवासी मौन क्यों?
  • सुबह पौ फटने से लेकर,रात के अंधेरे तक सूखा और गीले नशे का खेल खुलेआम हो रहा है,
  • क्या मजबूरी है, वार्डवासियों की जो सब-कुछ देखकर भी आंख और कान बंद किए हुए हैं,
  • इस वार्ड में खुलेआम राजनांदगांव, दुर्ग और भिलाई के छपरी जैसे लोगों का आना-जाना लगा रहता है,

(यतेन्द्र जीत सिंह छोटू ब्यूरो चीफ जिला खैरागढ़)
खैरागढ़:
शहर के बीस वार्डो मे से एक वार्ड ऐसा है, जहां अपराध और नशा बेखौफ फल-फूल रहा है,चाहे दिन का उजाला हो या रात का अंधेरा, यहां सुखा और गिला नशा का बाजार खुलेआम सजा हुआ रहता है, खुलेआम चौक चौराहों पर शराब और गांजे का कस लगाते आप देख सकते हैं,इस वार्ड में दो चौक है,पहला चौक शक्ति चौक और दूसरा संतोषी चौक, पहले चौक पर रजक जैसे नवयुवक का खौफ और भय व्याप्त है तो दूसरे चौक पर यादव युवक का खौफ और भय व्याप्त है।।

वार्डावासी बंद कर चूके हैं, आंख और कान, क्या मजबूरी है इनकी
इस वार्ड में जो हो रहा है इन सब से वार्डवासी अनजान नहीं है, लेकिन उनकी ऐसी क्या मजबूरी है की वो सब कुछ देखकर सुनकर भी कुछ नही बोलना चाहते हैं,उनकी क्या ऐसी मजबूरी है।।

अपराध और नशे के गर्त में डुबकी लगा रहे नौजवान और नैनीहाल
इस वार्ड में सुबह पौ फटने से लेकर रात के अंधेरे होते तक और पूरी रात नशे के गर्त में जा रहे हैं इस वार्ड के नौजवान,उनको देखकर नैनीहाल भी इस गर्त मे डुब रहे हैं,शराब की ढुलाई, सप्लाई, पाकेटमारी सब में माहिर हो गये है यहां के नाबालिग।।

जुआ और सट्टेबाजी का भी खेल इस वार्ड में बेखौफ हो रहा
रात के अंधेरे में बावन परी का खेल जोरों पर है।।बाहरी वार्ड के छपरी युवाओं का देर रात इस वार्ड के चौक चौराहों पर देख सकते हैं।।जिनको इस वार्ड के युवाओं का संरक्षण प्राप्त है।। दिन दहाड़े खुलेआम एक का अस्सी का खेल भी जारी है।। इनको किसी भी प्रकार का कानून का खौफ नहीं है।।

क्यों बर्दाश्त कर रहे बाहरी लोगों की घुसपैठी इस वार्ड में लोग, क्या मजबूरी है?
खुलेआम बाहरी वार्डवासियों का आधीरात तक आना जाना नशाखोरी करना,इस वार्ड में आदतन जारी है।। वार्ड के चार-पांच अपराधीक प्रवीती युवाओं के का पूरे शहर में बरेठपारा का नाम अपराध और नशे के नाम से बदनाम हो चुका है।।इस वार्ड के युवाओं तो थाना और जेल इस तरह से आते-जाते हैं जैसे उनका घर हो।।आतंक और भय के डर से लोग आधी रात को दरवाजा भी खोलना मुनासिब नहीं समक्षते।। क्या होगा इस वार्ड का, कौन सुधारेगा इस वार्ड को ?

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