नवोदय विद्यालय बोरई में छात्र से मारपीट का आरोप, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, संरक्षण के आरोप

दुर्ग। जवाहर नवोदय विद्यालय, बोरई में अध्ययनरत छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपों ने एक बार फिर संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक अभिभावक ने अपने पुत्र के साथ बेरहमी से मारपीट किए जाने का आरोप लगाते हुए प्राचार्य सहित प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है। गंभीर आरोप यह भी है कि पूर्व में की गई शिकायतों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

कक्षा दसवीं के छात्र से मारपीट का आरोप
अभिभावक द्वारा प्राचार्य को दिए गए पत्र के अनुसार कक्षा दसवीं के छात्र राजवीर देशलहरे को 28 सितंबर 2024 को शिक्षक सुजीत देशमुख द्वारा कथित रूप से बुरी तरह पीटा गया। आरोप है कि लिखावट छोटी होने और कॉपी में कट-छांट होने के कारण छात्र को हाथ, डंडे और अन्य वस्तुओं से मारा गया।
परिजनों का कहना है कि 29 सितंबर को मुलाकात के दौरान जब पिता ने बेटे की पीठ पर हाथ रखा तो वह दर्द से चिल्ला उठा। पीठ पर काले निशान पाए गए और हाथों में तेज दर्द की शिकायत की गई। छात्र ने बताया कि शिक्षक द्वारा अपमानजनक शब्दों का भी प्रयोग किया गया और परीक्षा में कम अंक देने की धमकी दी गई।
अभिभावक ने 4 अक्टूबर 2024 को अवकाश आवेदन के साथ पूरी घटना का उल्लेख करते हुए लिखित शिकायत दी। गेट रजिस्टर में भी मारपीट की जानकारी दर्ज कराए जाने का दावा किया गया है।

2022 में भी हुआ था मारपीट का आरोप
यह पहला मामला नहीं है। अभिभावक द्वारा 2 अप्रैल 2022 को भी एक शिकायत की गई थी, जिसमें उस समय कक्षा सातवीं में अध्ययनरत छात्र के साथ मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत में कहा गया था कि कान में गंभीर सूजन होने के बाद छात्र को दुर्ग के ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाना पड़ा।
पत्र में आरोप लगाया गया कि शिक्षक द्वारा छात्र को “विद्यालय का बोझ” कहकर अपमानित किया गया और कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। उस शिकायत की प्रतिलिपि जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और मीडिया को भी भेजी गई थी।

कार्रवाई पर सवाल
दो अलग-अलग वर्षों में की गई शिकायतों के बावजूद अब तक किसी स्पष्ट अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे अभिभावक और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। प्रश्न उठ रहा है कि क्या संबंधित शिक्षक को किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त है? या फिर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार होने के कारण शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया?

जांच और जवाबदेही की मांग
अभिभावक ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि संस्थागत स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है तो वे पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे।

विद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। शिक्षा जगत में यह सवाल उठ रहा है कि यदि आवासीय विद्यालय में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाती, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह न केवल एक शिक्षक की जवाबदेही का प्रश्न होगा, बल्कि पूरे संस्थागत तंत्र की संवेदनशीलता की परीक्षा भी होगी।

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