Wednesday, July 22, 2026

सहायक शिक्षकों के लिए समयमान वेतनमान का विकल्प तर्कसंगत नहीं: शिक्षक फेडरेशन

राजेश चटर्जी बोले: बिना स्वीकृति आदेश के विकल्प कैसे भरें, अंतिम तिथि बढ़ाई जाए

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने सामान्य प्रशासन विभाग के उस आदेश को औचित्यहीन बताया है जिसमें क्रमोन्नति योजना को समयमान वेतनमान में समाहित करने के लिए विकल्प मांगा गया है। फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने कहा कि सहायक शिक्षक संवर्ग को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान की स्वीकृति ही नहीं है तो विकल्प कैसे भरा जाए।

9 जून के आदेश पर आपत्ति
राजेश चटर्जी ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 9 जून 2026 को आदेश जारी कर प्रचलित क्रमोन्नति योजनाओं को वित्त विभाग के समयमान वेतनमान में समाहित करने के लिए कहा है। यह आदेश युक्तिसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग के 24 अप्रैल 2006 के आदेश से सहायक शिक्षक वेतनमान 4000-6000 ग्रेड पे 2400 को 12 और 24 वर्ष में क्रमशः 5000-8000 ग्रेड पे 4200 और 5500-9000 ग्रेड पे 4300 स्वीकृत हुआ था। बाद में 10 मार्च 2017 के आदेश से 10 वर्ष और 20 वर्ष में प्रथम और द्वितीय क्रमोन्नति स्वीकृत हुई।

समयमान योजना में विसंगति
फेडरेशन का कहना है कि वित्त विभाग के 28 अप्रैल 2008 के आदेश से समयमान वेतन योजना लागू की गई थी। इसमें प्रारंभिक वेतनमान 4000-6000 का प्रथम उच्चतर वेतनमान 4500-7000 और द्वितीय उच्चतर वेतनमान 5000-8000 है। राजेश चटर्जी ने सवाल उठाया कि यदि सहायक शिक्षक क्रमोन्नति का विकल्प लेता है तो उसे अन्य शासकीय सेवक की तरह तृतीय उच्चतर वेतनमान का लाभ नहीं मिलेगा। यदि समयमान का विकल्प लेता है तो स्वीकृत नहीं होगा क्योंकि सहायक शिक्षक को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान का लाभ स्वीकृत ही नहीं हुआ है।

उच्च वर्ग को लाभ, सहायक शिक्षक वंचित
उन्होंने बताया कि उच्च वर्ग शिक्षक, व्याख्याता और प्राचार्य को समयमान वेतनमान का लाभ पहले से स्वीकृत है। समयमान वेतनमान में सेवाकाल की गणना सेवा में प्रवेश की तिथि से होती है। ऐसे में सहायक शिक्षक संवर्ग के लिए समयमान वेतनमान का विकल्प लेना संभव ही नहीं है।

मुख्यमंत्री से मांग
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने मांग की है कि सहायक शिक्षक संवर्ग को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान स्वीकृत होने के बाद ही विकल्प लेने की अंतिम तिथि में वृद्धि की जाए। इस संबंध में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग और सचिव स्कूल शिक्षा को पत्र लिखा गया है।

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