Wednesday, July 22, 2026

सोमनाथ में अर्पित होगी बाबा रूख्खड़ की धूनी भस्म,निर्मल त्रिवेणी का जल पहुंचेगा सोमनाथ

(यतेन्द्र जीत सिंह छोटू ब्यूरो चीफ जिला खैरागढ़)
खैरागढ़:
सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के तहत रविवार को बाबा रूख्खड़ स्वामी की पावन शिवपीठ एवं निर्मल त्रिवेणी क्षेत्र में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। आमनेर, पिपरिया और मुस्का नदियों के संगम से पवित्र जल संग्रहित किया गया, वहीं बाबा रूख्खड़ स्वामी की तपोभूमि स्थित शिवपीठ परिसर से पवित्र मिट्टी लेकर उसे विधिवत कलश में सुरक्षित रखा गया। विशेष रूप से वर्षों से प्रज्वलित अखंड धूनी की पावन भस्म को भी मिट्टी के साथ सम्मिलित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच इन कलशों को सोमनाथ यात्रा के लिए तैयार किया गया, जिन्हें 22 जून को गुजरात रवाना किया जाएगा।

श्रद्धालुओं के अनुसार यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि खैरागढ़ की लोकआस्था, संत परंपरा और नदी संस्कृति का प्रतिनिधित्व है
यात्रा के दौरान निर्मल त्रिवेणी का जल, बाबा की तपोभूमि की मिट्टी और अखंड धूनी की भस्म प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ महादेव के श्रीचरणों में समर्पित की जाएगी। इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह का वातावरण है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसे गौरव का विषय मान रहे हैं।

इस अवसर पर एक रोचक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कड़ी भी चर्चा का विषय बनी हुई है
स्थानीय जनश्रुतियों में बाबा रूख्खड़ स्वामी को माँ नर्मदा का अनन्य भक्त माना जाता है, जबकि गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में भी “रुक्खड़ बावा”, “रुक्खड़ बापू” और “रुक्खड़ दादा” के रूप में उनसे जुड़ी लोकआस्था आज भी जीवंत है। गिरनार पर्वत की प्रसिद्ध लीली परिक्रमा में गाए जाने वाले लोकभजनों से लेकर अमरेली जिले के राजुला स्थित वावड़ी ग्राम और भावनगर क्षेत्र के आस्था केंद्रों तक रुक्खड़ परंपरा के अनेक संदर्भ देखने को मिलते हैं, जो छत्तीसगढ़ और गुजरात के बीच सांस्कृतिक समानता को दर्शाते हैं।

सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है
उनका मानना है कि यह यात्रा केवल दर्शन और पूजा का अवसर नहीं, बल्कि उन आध्यात्मिक सूत्रों को पहचानने का माध्यम भी है जो नर्मदा, संत परंपरा, गिरनार, राजुला, भावनगर और सोमनाथ को एक अदृश्य आस्था के धागे में जोड़ते हैं। निर्मल त्रिवेणी का जल, तपोभूमि की मिट्टी और अखंड धूनी की भस्म जब सोमनाथ महादेव के चरणों में अर्पित होगी, तब खैरागढ़ की श्रद्धा और संत परंपरा का संदेश भी देशभर में पहुंचेगा।।

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