Saturday, January 17, 2026

सरकारी स्कूलों की ऑडिट रिपोर्ट ने शिक्षा गुणवत्ता की कलाई खोल दी – वंदना राजपूत

मध्यम एवं गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़

रायपुर। सरकारी स्कूलों के सोशल ऑडिट रिपोर्ट पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि भाजपा सरकार में सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय होती जा रही है, शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत राज्य के 56895 सरकारी स्कूलों के सोशल ऑडिट सामने आए हैं जिनमें 9540 स्कूलों को डी ग्रेड मिला है इसका मतलब है कि बच्चों को अक्षर ज्ञान तक नहीं हो पाया है। सरकारी स्कूलों के सोशल ऑडिट में 30570 स्कूलों को बी ग्रेड मिला है। मतलब बी ग्रेड में बच्चे सिर्फ सामान्य है जबकि वर्तमान में जो कम्पीटिशन चल रहा है उसके लिए बच्चों को उच्च क्वालिटी की शिक्षा जरूरी है, लेकिन वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार में शिक्षा के नाम पर सिर्फ और सिर्फ खाना पूर्ति की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार की ग़लत नीति के कारण आज शिक्षा की गुणवत्ता नीचे गिरते जा रहा है, स्कूलों में युक्ति युक्तकरण के नाम पर लगभग 10500 स्कूल बंद किए गए. कई स्कूलों को मर्ज कर दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि जब से भाजपा की सरकार प्रदेश में आई है तब से शिक्षा विभाग भगवान के भरोसे से ही चल रहा है। दो सत्र तो बिना शिक्षा मंत्री के निकल गए थे। सत्र में विद्यालय खुलने के तीन-चार महीना बाद भी स्कूलों में पाठ्य पुस्तक नहीं मिल पाया था और इसी बात को लेकर के एक सहायक शिक्षक ने आवाज उठाई कि हम प्रदेश में रजत जयंती मना रहे हैं लेकिन बच्चों के पास पढ़ने के लिए किताबें नहीं है तो उस गुरु जी को निलंबित कर दिया जाता है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर्मचारियों के साथ हिटलर शाही जैसे बर्ताव कर रहा है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर तो नीचे गिरना ही था। शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगातार उलझाए जाने से उनका ध्यान एवं समय अन्य कार्यों में लग जाता है। वर्तमान में ही भाजपा सरकार के द्वारा आदेश जारी किया जाता है कि शिक्षकों को आवारा कुत्तों की जानकारी की ज़िम्मेदारी दी जाती है। शिक्षक मानसिक तनाव से ग्रसित होते जा रहे हैं। इधर सिलेबस आधा भी नहीं हुआ है और दिसंबर महीना में छैमाही परीक्षा होना है और फरवरी में बोर्ड परीक्षा ऐसे समय में हजारों शिक्षक शिक्षिकाओं की गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्य के लिए बी एल ओ के रूप में ड्यूटी लगाने की वजह से स्कूलों में पढ़ाई का बुरा हाल है। शिक्षक जो बच्चों के जीवन रूपी इमारत के शिल्पकार होते हैं उनका लगातार गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझाए रखने से शिक्षा के गुणवत्ता में लगातार गिरावट हो रहा है जिससे मध्यवर्गीय एवं गरीब परिवार के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

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