कांग्रेस भवन में चलता था कोल लेवी घोटाले का खेल! EOW की चार्जशीट में बड़ा धमाका..
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में फिर मचा भूचाल! बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में अब जो खुलासा हुआ है, उसने कांग्रेस के शीर्ष ठिकानों तक सवालों की बौछार कर दी है।
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की ताज़ा चार्जशीट के मुताबिक, इस घोटाले का लेन-देन सीधे कांग्रेस भवन में होता था!
1,500 पन्नों की चार्जशीट में चौंकाने वाला खुलासा
EOW ने विशेष अदालत में जो 1,500 पन्नों का दूसरा पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है, उसमें बताया गया है कि अवैध कोल लेवी से जुड़ा पैसा ‘भवन’ नामक खातों के जरिए कांग्रेस भवन में ही घुमाया जाता था।
मुख्य आरोपी देवेंद्र डडसेना इस पूरे रैकेट का वित्तीय मास्टरमाइंड बताया गया है।
करोड़ों की अवैध वसूली, कांग्रेस भवन में लेन-देन
चार्जशीट के मुताबिक, डडसेना की जिम्मेदारी थी—
अवैध रकम की रिसीविंग, कस्टडी और ट्रांसफर
कांग्रेस भवन में करोड़ों रुपये का लेन-देन
EOW ने साफ लिखा है— डडसेना ही था घोटाले की वित्तीय कड़ी, जिसने सिस्टम से लेकर सियासत तक पैसे की धार बहाई।
रायगढ़ से चल रहा था वसूली सिंडिकेट
रिपोर्ट में रायगढ़ के नवनीत तिवारी को भी कोल वसूली सिंडिकेट का सदस्य बताया गया है।
वह ट्रांसपोर्टरों और व्यवसायियों से करोड़ों रुपये की अवैध वसूली कर नेटवर्क को फंड करता था।
570 करोड़ का कोल लेवी घोटाला
यह पूरा मामला कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उजागर हुआ था।
घोटाले की अनुमानित राशि — करीब ₹570 करोड़ रुपये!
यह अब तक का छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला माना जा रहा है।
EOW की कार्रवाई: बड़े नामों पर शिकंजा
EOW ने जुलाई 2024 में इस केस में पहला आरोप पत्र दाखिल किया था।
इन 15 आरोपियों में शामिल थे —
पूर्व CM भूपेश बघेल की उपसचिव सौम्या चौरसिया
निलंबित IAS रानू साहू
अब दूसरी चार्जशीट में सीधे कांग्रेस भवन तक रिश्वत के तार पहुंच गए हैं।
सियासी भूचाल तय!
इस खुलासे के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल आना तय है।
कांग्रेस अब कटघरे में है — और EOW की रिपोर्ट ने इस घोटाले को सिर्फ “अवैध लेवी” नहीं, बल्कि “सत्ता के संरक्षण में चल रहे संगठित रैकेट” के रूप में पेश किया है।
अब बड़ा सवाल — क्या कांग्रेस नेतृत्व इन आरोपों का जवाब देगा, या फिर यह मामला और गहराई तक जाएगा?
