हिमंत बिस्वा सरमा ने भूपेश बघेल समेत कांग्रेस के तीन दिग्गज नेताओं पर ठोका केस
गुवाहाटी/रायपुर। असम की राजनीति में बड़ा सियासी धमाका हुआ है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। यह मुकदमा 10 फरवरी 2026 को गुवाहाटी की अदालत में दायर किया गया, जिसमें दीवानी और आपराधिक—दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई शामिल है।
किन नेताओं पर दर्ज हुआ मुकदमा
मुख्यमंत्री सरमा द्वारा दायर इस हाई-प्रोफाइल मानहानि केस में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कांग्रेस के असम प्रभारी जितेंद्र सिंह और असम कांग्रेस अध्यक्ष व सांसद गौरव गोगोई को नामजद किया गया है। वहीं, कुछ राजनीतिक और कानूनी हलकों में कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया का नाम भी आगे चलकर मामले में शामिल होने की चर्चा है।
क्या है पूरा विवाद
इस विवाद की जड़ 4 फरवरी 2026 को गुवाहाटी में आयोजित कांग्रेस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस है। इस प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे। कांग्रेस का दावा था कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने असम में करीब 12 हजार बीघा, यानी लगभग चार हजार एकड़ जमीन पर अवैध और बेनामी तरीके से कब्जा कर रखा है।
इसी अभियान के तहत कांग्रेस ने “Who Is HBS” नाम से एक वेबसाइट और पंपलेट भी जारी किए थे, जिनमें मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और जमीन घोटाले के आरोप लगाए गए थे।
मुख्यमंत्री का पलटवार, अदालत में चुनौती
इन आरोपों को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पूरी तरह झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक बताया है। उन्होंने गुवाहाटी की अदालत में सिविल और क्रिमिनल—दोनों तरह की कार्यवाही शुरू करते हुए साफ कहा है कि अब “हिट एंड रन की राजनीति” नहीं चलेगी।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर विपक्षी नेताओं को खुली चुनौती दी है कि वे अदालत में अपने आरोपों को सबूतों के साथ साबित करें, अन्यथा 500 करोड़ रुपये का हर्जाना देने के लिए तैयार रहें। सरमा का कहना है कि यह मामला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है।
भूपेश बघेल का जवाब
मानहानि के इस मुकदमे पर भूपेश बघेल ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि केस दर्ज कराने के बजाय मुख्यमंत्री को अपनी संपत्तियों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। बघेल ने मांग की है कि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए। साथ ही उन्होंने 2006 से 2021 के बीच हिमंत बिस्वा सरमा की संपत्ति में कथित तेज बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए हैं।
गोगोई के दावे और सरमा का जवाब
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने दावा किया है कि उनके पास मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा नियमों का उल्लंघन कर जमीन हासिल करने से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गोगोई पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं और उनके बच्चों के धर्म व पासपोर्ट से जुड़े मामलों को लेकर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
चुनाव से पहले सियासी तापमान चरम पर
2026 के असम विधानसभा चुनाव से पहले यह कानूनी टकराव राज्य की राजनीति में नई गर्मी लेकर आया है। मामला अब आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर अदालत की दहलीज तक पहुंच चुका है। अब यह तय होना है कि सियासी जंग में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या है और अदालत किसके पक्ष में फैसला सुनाती है।
