रायपुर। राजधानी रायपुर में एक बार फिर सरेराह मारपीट और गुटबाजी का मामला सामने आया है। आए दिन हो रही आपराधिक वारदातों और सड़क पर खुलेआम होने वाली झड़पों से शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ताज़ा घटना पंडरी थाना क्षेत्र की है, जहाँ बीते शाम करीब 7 बजे साइंस सेंटर रोड पर दो गुटों के बीच मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई और लात-घूँसों तक पहुँच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क किनारे स्थित ठेले-गुमटी के पास रोजाना युवकों का जमावड़ा लगता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ अक्सर गुटों के बीच विवाद की स्थिति बनती रहती है। कल शाम भी कुछ इसी तरह हुआ, जब दो गुटों के बीच पहले कहासुनी हुई और देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई। कुछ ही मिनटों में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला कर दिया और सड़क पर हंगामा मच गया।
इस दौरान आसपास के लोगों ने घटना का मोबाइल वीडियो बना लिया। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों गुटों के युवक एक-दूसरे से भिड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। लोग इस वीडियो को शेयर कर राजधानी की बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जता रहे हैं।
सूचना पाकर पुलिस की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुँची, लेकिन तब तक सभी आरोपी युवक वहाँ से फरार हो चुके थे। घटना की जानकारी मिलने पर पंडरी थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है और जल्द ही उन्हें पकड़ने का दावा कर रही है।
डीएसपी स्तर के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। साथ ही, ठेले-गुमटी और सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक रूप से जमा होने वाले युवकों की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में पिछले कुछ समय से इस तरह की गैंगबाजी और गुटबाजी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। आए दिन हो रही सड़क पर मारपीट, चाकूबाजी और गुटीय झगड़े आम नागरिकों में भय का माहौल बना रहे हैं। इससे न केवल शहर की शांति भंग होती है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सीधा सवाल खड़ा होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय, ऐसे जमावड़ों पर पहले से रोक लगानी चाहिए। मोहल्लों और बाजार क्षेत्रों में शाम के समय सक्रिय निगरानी रखी जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजधानी में युवाओं के बीच बढ़ती गुटबाजी और असामाजिक प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन और पुलिस को कौन-सी ठोस रणनीति अपनानी होगी। यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में ऐसे सड़क छाप झगड़े गंभीर अपराध का रूप भी ले सकते हैं।
