बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश महापात्रा के फेसबुक वाल के संभार
रायपुर। ननकी राम कंवर छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रमुख आदिवासी नेता हैं, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हाल ही में, 4 अक्टूबर 2025 को रायपुर में उनके हाउस अरेस्ट की घटना ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचा दी।
4 अक्टूबर 2025 को ननकी राम कंवर को रायपुर में हाउस अरेस्ट किया गया, जब वे कोरबा जिले के कलेक्टर अजीत वसंत को हटाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आवास (सीएम हाउस) के बाहर धरना देने जा रहे थे। यह घटना केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान हुई, जिसने इसे और भी चर्चा का विषय बना दिया।
कंवर को रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पास रोका गया और बाद में वैश्य समाज के गहोई भवन में नजरबंद कर दिया गया। पुलिस ने भवन के आसपास घेराबंदी की और उन्हें बाहर निकलने से रोका।
ननकी राम ने नजरबंदी के खिलाफ विरोध जताया और गहोई भवन के गेट को कूदकर निकलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान उनके पोते के साथ भी पुलिस की नोकझोंक हुई। कंवर ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना को “भाजपा का अनोखा राज” बताते हुए सरकार पर तंज कसा और इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया।
प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने कंवर से मुलाकात कर उन्हें शांत करने की कोशिश की, लेकिन कंवर ने चेतावनी दी कि अगर सरकार का यही रवैया रहा तो अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 15 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी।
ननकी राम कंवर ने कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत के खिलाफ 14 गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें शामिल हैं:
स्व-सहायता समूह की महिलाओं से अरबों रुपये की ठगी।
फर्जी मुआवजे का वितरण।
हिटलरशाही तरीके से प्रशासन का संचालन।
भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताएँ।
कंवर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कलेक्टर के तबादले की मांग की थी और 4 अक्टूबर तक कार्रवाई न होने पर धरना देने की चेतावनी दी थी। उनकी मांग पूरी न होने पर उन्होंने रायपुर में धरना देने का निर्णय लिया, जिसे प्रशासन ने रोकने के लिए हाउस अरेस्ट का सहारा लिया।
यह घटना न केवल प्रशासनिक कार्रवाई थी, बल्कि भाजपा के आंतरिक गुटबाजी को भी उजागर करती है। कंवर का अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ खुलकर बोलना और धरना देने की कोशिश छत्तीसगढ़ भाजपा में उनकी असंतुष्टता को दर्शाती है। यह घटना अमित शाह के दौरे के दौरान हुई, जिससे यह संदेश गया कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
ननकी राम कंवर छत्तीसगढ़ भाजपा के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली आदिवासी नेताओं में से एक हैं। कोरबा जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र (अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित) से वे सात बार विधायक चुने गए हैं।
कंवर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अविभाजित मध्य प्रदेश में की, जहाँ वे कैबिनेट मंत्री रहे। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद उन्होंने नई सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।पहली भाजपा सरकार में कृषि, राजस्व, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन, खाद्य और विधि-विधायी कार्य मंत्री। गृहमंत्री और वन मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके गृहमंत्री कार्यकाल में नक्सलवाद के खिलाफ सख्त नीतियों को लागू किया गया, जिसके लिए वे आज भी जाने जाते हैं। रामपुर से सात बार विधायक चुने जाना उनकी लोकप्रियता और क्षेत्र में मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
ननकी राम कंवर को नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख के लिए जाना जाता है। उन्होंने दावा किया कि “उनके गृहमंत्री कार्यकाल (2003-2008) में नक्सलवाद को खत्म किया जा सकता था, अगर केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सहयोग किया होता।”
कंवर छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय में एक मजबूत चेहरा हैं, खासकर कोरबा और महासमुंद जैसे क्षेत्रों में। उनकी जनसेवा, कृषि और गौसेवा से जुड़े कार्यों ने उन्हें आदिवासी वोटरों के बीच लोकप्रिय बनाया। वे भाजपा के लिए आदिवासी वोट बैंक को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ में पार्टी की सफलता का एक प्रमुख कारक है।
कंवर को रामपुर से टिकट नहीं मिला, जिससे उनकी नाराजगी सामने आई। फिर भी, उन्होंने पार्टी के लिए प्रचार किया, लेकिन हाल के वर्षों में वे अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हो गए।
उन्होंने भ्रष्टाचार, पीएससी घोटाले और महादेव सट्टा ऐप जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
2025 में उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार को “फेल” करार दिया और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी शिकायतें दर्ज कीं, जिसमें उन्होंने पार्टी नेतृत्व और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
कंवर का अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना और हाउस अरेस्ट की घटना ने भाजपा में आंतरिक असंतोष और गुटबाजी को उजागर किया। उनकी बगावत ने यह संदेश दिया कि वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है, जिसका असर पार्टी के आदिवासी आधार पर पड़ सकता है।
हालांकि कंवर की लोकप्रियता और आदिवासी समुदाय में प्रभाव अभी भी बरकरार है, उनकी हालिया गतिविधियाँ और सरकार के खिलाफ रुख ने उन्हें विवादों में ला दिया है। उनकी चेतावनी कि “भाजपा को अगले चुनाव में 15 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी” पार्टी के लिए एक चेतावनी है, खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में। फिर भी, उनकी अनुभवी छवि और नक्सल-विरोधी रुख उन्हें भाजपा के लिए महत्वपूर्ण बनाए रखता है।
ननकी राम कंवर का हाउस अरेस्ट छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक असामान्य और महत्वपूर्ण घटना है। यह न केवल प्रशासनिक कार्रवाई थी, बल्कि भाजपा के आंतरिक मतभेदों को भी उजागर करती है। कंवर जैसे वरिष्ठ नेता का अपनी ही सरकार के खिलाफ खुला विरोध और नजरबंदी की स्थिति पार्टी के लिए नकारात्मक संदेश दे सकती है, खासकर जब अमित शाह जैसे केंद्रीय नेता राज्य में मौजूद थे।
हाल के वर्षों में उनकी नाराजगी और बगावत ने पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी की हैं। उनकी आलोचनाएँ, विशेष रूप से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं पर, सरकार की छवि को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
खबर आलोक की ओर से धन्यवाद सुरेश जी
