प्राचार्य द्वारा यौन उत्पीड़ित 14 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या का जिम्मेदार कौन ?

देवेंद्रनाथ शर्मा जी के फेसबुक वाल से लिया गया

छत्तीसगढ़। एक बेहद पीड़ा दायक खबर प्रदेश के जयपुरनगर जिले के बगीचा थाना क्षेत्र के ग्राम गोवाशी से मिली। इस गांव में एक निजी स्कूल में 9 वीं कक्षा में पत्थलगांव की अध्ययनरत छात्रा अपने स्कूल के ही प्राचार्य द्वारा लगातार दी जा रही यौन प्रताड़ना से तंग आकर हॉस्टल के अपने कमरे में फांसी लगा ली और अपनी जान दे दी l कमरे में मिले पीड़िता के सुसाइडल नोट में यह खुलासा हुआ कि प्राचार्य पीड़िता को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना देता रहा है और ऐसा वह कई और छात्राओं के साथ करता रहा है l पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी प्राचार्य को गिरफ्तार कर रिमांड पर ले लिया है।

दरअसल भारतीय समुदायों में लैंगिक भेदभाव और पीड़ित को ही दोषी ठहराने की भावनाएँ गहराई से समाई हुई हैं, जिससे व्यक्तियों के लिए अपने अनुभवों को व्यक्त करना मुश्किल हो जाता है। ये हानिकारक मान्यताएँ अक्सर उत्पीड़न से पीड़ित लोगों के लिए समर्थन की कमी का कारण बनती हैं। उत्पीड़न को एक होती रहती सामान्य घटनाओं के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार कर लेने से यह चुप्पी और मजबूत हो जाती है, तथा पीड़ितों को आगे आकर न्याय मांगने से रोकती है।

आत्महत्या करने वाली नाबालिग बेटी अपने गुरु द्वारा किए जा रहे इस कृत्य को अपने पालकों तक को नहीं बता सकी l न जाने कब से मानसिक यंत्रणा को सहते हुए अपने भावी जीवन में अंधकार का आभास करती रही होगी और उसका बाल मन अंतत: हार गया l समाज इस अपराध की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता हैl

हैरानी की बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में इस प्रकार चल रहे स्कूलों की कोई मॉनिटरिंग की व्यवस्था है कि नहीं… यदि है तो ऐसी घटनाओं को रोकने में क्यों असफल रहती हैं l इस प्रकार चल रहे स्कूलों में क्या कुछ हो रहा है उसकी जानकारी न तो पालकों को रहती है और न ही शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों को और इसलिए इस प्रकार की बिना डर और लिहाज के घटनाएँ हो जाती हैं l ग्राम पंचायत व जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधियों की भी तो कोई ज़िम्मेदारी बनती है कि बेटियों के लिए संस्था मै सुरक्षा का माहौल बना रहे एवम् ऐसी घटनाएं न हों l

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