Wednesday, March 4, 2026

जब रेल के नाम पर भिलाई की अस्मिता दाव पर…

लग गई थी, बाजपेयी ने की थी जोरदार पैरवी …


(वरिष्ठ पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन के फेसबुक वाल से)

भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट के अधिशासी निदेशक (वर्क्स) रहे बृजमोहन कुमार बाजपेयी ने 18 फरवरी 2026 की शाम इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आज मुक्तिधाम में उन्हें विदाई देने बीएसपी के ऐसे बहुत से अफसर मुक्तिधाम में मौजूद थे, जो उनके दौर के साक्षी थे।

अपने राजनांदगांव वाले (स्व.) शिवराज जैन के बाद बीएमके बाजपेयी ऐसे दूसरे ठेठ छत्तीसगढ़िया इंजीनियर थे, जो शीर्ष पर रहे और जिन्होंने भिलाई को लेकर अपना सर्वाधिक योगदान दिया। वैसे तो स्व. बाजपेयी के बताने के लिए बहुत कुछ है। पिछले ही साल उनकी एक किताब भी प्रकाशित हुई। फिर भी कुछ बातें यहां मुख्तसर तौर पर..

हाल के दो बरस में उनसे दो-तीन मरतबा मैनें इंटरव्यू किए थे। जिससे उनके दौर के घटनाक्रम का डाक्यूमेंटेशन हो सके। इस दौरान उन्होंने दिल खोल कर बातें की थी। पहला वाक्या खन्ना रेल दुर्घटना का। पंजाब में उत्तरी रेलवे के खन्ना-लुधियाना खंड पर खन्ना के पास 26 नवंबर 1998 को एक बड़ा रेल हादसा हुआ था। इस हादसे में 250 से ज्यादा जानें गईं थी।

तब केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के जज जस्टिस जीसी गर्ग की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय आयोग को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच आगे बढ़ी तो अचानक देखते ही देखते बात भिलाई की रेल पटरियों पर आ गई। पूरा माहौल ऐसा बनाया गया कि इस हादसे के लिए भिलाई की रेल पटरियां जिम्मेदार है। षड़यंत्र बड़े ही ऊंचे स्तर का था।

दरअसल, तब रेल उत्पादन में निजी क्षेत्र भी आगे आ रहा था और भिलाई के ही आला अफसर यहां से वहां ज्वाइन कर रहे थे। लिहाजा, अफवाहों का बाजार गर्म था। तब मेरे शहर के एक-दो पत्रकारों ने भी बीएसपी के कुछ ‘बागी’अफसरों के प्रभाव में आकर इस फर्जीवाड़े को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। खैर, जांच पूरी हुई और आयोग के अध्यक्ष के नाते जस्टिस गर्ग अपना फैसला लिखवाने वाले थे। तब तक बीएमके बाजपेयी बीएसपी के ईडी वर्क्स बन चुके थे।
जब उन्हें पता लगा कि फैसला लिखा जाने वाला है तो उन्होंने अपने माध्यमों से जस्टिस गर्ग से संपर्क साधा और समय मिलते ही आनन-फानन में दिल्ली पहुंचे और जस्टिस गर्ग के सामने भिलाई की रेल पर प्रेजेंटेशन दिया।

बाजपेयी बताते थे, तब जस्टिस गर्ग ने महज 15 मिनट का वक्त दिया था लेकिन जब उन्होंने दलीलें रखना शुरू कीं तो डेढ़ घंटे से भी ज्यादा देर तक सारी बातें सुनते रहे। तब बाजपेयी ने उन्हें बताया था कि पूरे हिंदुस्तान में जहां भी ट्रेन दौड़ रही हैं, वहां भिलाई में बनीं शत-प्रतिशत पटरियां लगी हैं।

फिर अमेरिका, कोरिया से लेकर दुनिया के तमाम देशों में भिलाई की पटरियां गईं हैं। कहीं से भी किसी भी हादसे में भिलाई की पटरियों की क्वालिटी को लेकर कोई बात नहीं आई है। इस प्रस्तुतिकरण के बाद जस्टिस गर्ग ने फैसला लिखवाने का काम रोक दिया और सीधे भिलाई स्टील प्लांट की रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल देखने और उत्पादन तकनीक से जुड़ी जरूरी जानकारियां लेने की बात कही। फिर जस्टिस गर्ग तीन दिन के दौरे पर अपनी टीम के साथ भिलाई आए, उन्होंने तमाम जानकारी ली। ईडी वर्क्स बीएमके बाजपेयी की सूझबूझ का नतीजा था कि आगे भिलाई की रेलपांत पर कोई सवाल नहीं उठा।

एक और बात बताते चलूं। बीएमके बाजपेयी को ‘क्रॉप’ का जादूगर कहा जाता था। अपने कर्मियों से संवाद की यह पहल क्रिएटिंग रिस्पांसिबल आर्गनाइजेशन ऑफ प्युपिल (क्रॉप) ऐसे वक्त में हुई थी, जब अटलबिहारी बाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में स्थापित सार्वजनिक उपक्रम बालको कोरबा को बेच दिया था।

इधर बीएसपी के साथ-साथ ‘सेल’ की भी हालत बहुत ज्यादा नाजुक हो चली थी। मकान बेचने की नौबत आ चुकी थी। कंपनी के ‘बीआईएफआर’ में जाने की चर्चा थी। कर्मियों में डर था कि बाल्को के बाद अगला नंबर भिलाई का है। कर्मियों के इस गिरे हुए मनोबल को उपर लाने का बीड़ा तब ईडी वर्क्स बीएमके बाजपेयी ने उठाया था।

उन्होंने ‘क्रॉप’ के नाम रोजाना कर्मियों से संवाद शुरू किया। उन्होंने 54 दिन में तब करीब 28 हजार कर्मियों से सीधा संवाद किया था। तब बीटीआई के 3 हॉल में 800-800-800 लोगों का बैच रोज जुटता था और इनमें दूसरे तमाम अफसरों के साथ बीएमके बाजपेयी भी कर्मियों से सीधे बात करते थे।

इसका ब्यौरा फिर कभी..वैसे स्व. बाजपेयी की पहल ‘क्रॉप’ ने वाकई में सकारात्मक परिणाम दिए थे। इस ‘क्रॉप’ का एक और पहलू है, जो कम लोगों को मालूम है। बीएमके बाजपेयी के ‘क्रॉप’ की गूंज राजधानी रायपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी तक भी पहुंची थी। जोगी 2003 के विधानसभा चुनाव के पहले कुछ ऐसा ही संवाद सत्र कांग्रेसजनों के लिए आयोजित करना चाहते थे। इसके ऐवज में जोगी चाहते थे कि बाजपेयी कहीं से भी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ लें। हालांकि इस पर बात आगे नहीं बढ़ी थी।

एक और किस्सा जो अक्सर बाजपेयी बताते थे, वह स्टील मेल्टिंग शॉप-2 से जुड़ा है। जब 40 लाख विस्तारीकरण में प्लेट मिल चालू हो चुकी थी लेकिन एसएमएस-2 में देरी हो रही थी। दिल्ली से स्वाभाविक दबाव भी था। तब के एमडी निमाई कुमार मित्र के सामने रशियन एक्सपर्ट ने दिसंबर 1984 तक की मियाद बता दी थी।

लेकिन तब बीएमके बाजपेयी ने तमाम आंकलन कर सीधे कह दिया था कि 30 जुलाई को कमीशनिंग कर लेंगे। हालांकि तब उनकी बात पर उपरी मैनेजमेंट बहुत गंभीर नहीं हो पाया था लेकिन जब बाजपेयी ने पूरी बात रखी तो मैनेजमेंट ने भी आगे बढ़ने के निर्देश दिए। इसके बाद स्टील मेल्टिंग शॉप-2 का पहला एलडी कनवर्टर एमडी निमाई कुमार मित्र के हाथों 29 जुलाई 1984 को शुरू करवाया। फिर अगले दिन 30 जुलाई को पहला स्लैब कास्ट किया गया। इस उपलब्धि में स्व. बाजपेयी का सर्वाधिक योगदान रहा।

स्व. बीएमके बाजपेयी के बारे में बताने को बहुत कुछ है। सेवानिवृत्ति के बाद वे लगातार सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय थे। उनका योगदान भिलाईवासी कभी भूल नहीं पाएंगे।
(यहां फोटो पिछले साल उनके इंटरव्यू के दौरान उन्हीं के घर की है और नीचे ब्लैक एंड वाइट फोटो 1999 की तब के एमडी विक्रांत गुजराल की प्रेस कान्फ्रेंस की है। तब भिलाई स्टील प्लांट के आला अफसर अपने पूरे ‘मंत्रिमंडल’ के साथ साल में एक बार प्रेस से रूबरू होते थे और हर सवाल का सामना करते थे।)

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