राजनांदगांव/ नियम जनता के लिए, छूट नेताओं के लिए? राजनांदगांव। शहर में VVIP मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक नियमों की खुली अवहेलना का मामला फिर सामने आया है। कल जिला कार्यालय में बैठक लेने के बाद प्रभारी मंत्री को सुरक्षा दल ने रॉंग साइड से बाहर निकाला, जबकि इससे पहले भी जब-जब कोई भी वीआईपी कलेक्ट्रेट ऑफिस में बैठक के लिए आता है, उनकी वापसी रॉंग साइड से ही कराई जाती है।
बार-बार दोहराई जा रही वही गलती*
जनता का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। कलेक्टोरेट परिसर में हर बड़े वीआईपी कार्यक्रम के बाद सड़क को एक तरफ ब्लॉक किया जाता है, और दूसरी ओर से VVIP गाड़ियों का गलत दिशा में संचालन कराया जाता है। यह स्थिति न केवल ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिए भी जोखिमभरी है।
▪️सवाल—क्या नेता नियमों से ऊपर हैं?
आम नागरिक यदि रॉंग साइड से वाहन चलाए, तो चालान, जुर्माना, सख्त चेतावनी, सब कुछ तुरंत मिलता है। लेकिन जब बात नेताओं और मंत्रियों की आती है, तो वही गलती “प्रोटोकॉल” के नाम पर सही कैसे हो जाती है? क्या ट्रैफिक नियम सिर्फ जनता के लिए हैं? क्या कानून सब पर समान रूप से लागू नहीं होना चाहिए?
▪️पुलिस की जिम्मेदारी या जल्दबाज़ी?
प्रोटोकॉल का उद्देश्य सुरक्षित और व्यवस्थित मूवमेंट देना होता है न कि नियम तोड़कर वीआईपी को जल्दी बाहर निकालना। विशेषज्ञ कहते हैं “रॉंग साइड मूवमेंट न सिर्फ ट्रैफिक एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि यह दुर्घटना का बड़ा कारण भी बन सकता है।”
▪️जनता में बढ़ रहा रोष
कलेक्टोरेट क्षेत्र में रोज़ाना हजारों लोग आवाजाही करते हैं। लोगों का कहना है कि “पुलिस हमसे ट्रैफिक नियमों का पालन कराती है, पर खुद वीआईपी के समय नियम तोड़ती है—ये दोहरा मापदंड क्यों?”
▪️प्रशासन की चुप्पी जारी
अब तक इस मुद्दे पर किसी अधिकारी ने कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है। नियम उल्लंघन के वीडियो और तस्वीरें बार-बार सामने आती रहती हैं,
लेकिन कार्रवाई शून्य है।
▪️जनता की मांग—ट्रैफिक नियम सबके लिए बराबर हों
नागरिक संगठनों का कहना है कि “नेता जनता के प्रतिनिधि हैं, इसलिए उन्हें नियमों का पालन सबसे पहले करना चाहिए।” साफ संदेश यही है, रॉंग साइड से VIP मूवमेंट की परंपरा तुरंत बंद होनी चाहिए।
