छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटें रिक्त होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज थी, लेकिन अब तस्वीर लगभग साफ होती दिख रही है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर एक-एक सीट भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के खाते में जानी है। दोनों दलों ने 4 मार्च की रात साढ़े 10 बजे तक एक-एक प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, जिससे निर्विरोध निर्वाचन के प्रबल संकेत मिल रहे हैं।
भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने वरिष्ठ आदिवासी नेता फूलोदेवी नेताम पर दोबारा भरोसा जताया है। दोनों प्रत्याशी गुरुवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में अपना नामांकन दाखिल करेंगे, क्योंकि नामांकन की अंतिम तिथि वही है।
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि अब तक जो संकेत मिले हैं, उनके अनुसार दोनों ही दलों की ओर से केवल अधिकृत प्रत्याशी ही पर्चा दाखिल करेंगे। यदि ऐसा हुआ और कोई अन्य वैध नामांकन सामने नहीं आया, तो दोनों सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन तय हो जाएगा।
हालांकि प्रक्रिया की दृष्टि से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट तभी होगी, जब नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की समयसीमा पूरी हो जाएगी। यदि एक भी अतिरिक्त नामांकन दाखिल हुआ, वह वैध पाया गया और वापस नहीं लिया गया, तो चुनाव की स्थिति बनेगी। ऐसी दशा में 16 मार्च को विधानसभा में मतदान होगा और विधायक राज्यसभा सांसदों का चुनाव करेंगे।
फिलहाल दोनों दलों के भीतर से जो संकेत मिल रहे हैं, वे निर्विरोध निर्वाचन की दिशा में ही इशारा कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह छत्तीसगढ़ की राजनीति में सहमति आधारित चुनाव का उदाहरण भी माना जाएगा।

चुनावी गणित और प्रक्रिया
कुल रिक्त सीटें: 2
संभावित बंटवारा: 1 भाजपा, 1 कांग्रेस
भाजपा प्रत्याशी: लक्ष्मी वर्मा
कांग्रेस प्रत्याशी: फूलोदेवी नेताम
नामांकन की अंतिम तिथि: गुरुवार
यदि अतिरिक्त वैध नामांकन हुआ: 16 मार्च को मतदान
वर्तमान संकेत: दोनों सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन की संभावना प्रबल
राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से नहीं होते, लेकिन इनके जरिए राजनीतिक दल अपने सामाजिक और संगठनात्मक संदेश स्पष्ट करते हैं। छत्तीसगढ़ में इस बार मुकाबले से अधिक सहमति की तस्वीर उभरती दिख रही है—अब अंतिम मुहर नामांकन प्रक्रिया के बाद लगेगी।




