Friday, March 6, 2026

खैरागढ़ महाविद्यालय में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

खैरागढ़ : रानी रश्मि देवी सिंह शासकीय महाविद्यालय खैरागढ़ में प्राचार्य डॉ. ओ. पी. गुप्ता के मार्गदर्शन में विज्ञान संकाय और आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘साइंटिफिक इनोवेशन इन ग्रीन सोसाइटी’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला 29 एवं 30 अक्टूबर का आयोजित हुआ।।29 अक्टूबर 2025 को इस आयोजन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रेमकुमार पटेल, सीईओ जिला पंचायत केसीजी, अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य जितेन्द्र कुमार साखरे,मुख्य वक्ता डॉ. दीप्ति चौहान, स. प्रा. वनस्पतिशास्त्र भिलाई महिला महाविद्यालय भिलाई, विशिष्ट अतिथि जे. के. वैष्णव पूर्व छात्रसंघ प्रभारी उपस्थित रहें।। कार्यशाला के मुख्य अतिथि प्रेम कुमार पटेल ने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए वृक्षारोपण, प्लास्टिक निषेध, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण गतिविधियों से परिचय कराया।।

उन्होंने इस सम्बन्ध में सरकार द्वारा चलाए जा रही योजनाओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया ।। अपनी छोटी-छोटी अच्छी आदतों से किस तरह ऊर्जा संरक्षण और हरित समाज की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया जा सकता है? इसे उन्होंने उदाहरण सहित समझाया। इससे पहले अपने स्वागत भाषण में प्रभारी प्राचार्य डॉ. जितेन्द्र साखरे ने विकास के समनांतर पर्यावरण संरक्षण को महत्व देते हुए छात्र-छात्राओं को इस दिशा में वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से कार्य करने का आह्वान किया।। प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ उन्होंने व्यक्तित्व निर्माण पर जोर दिया।। कार्यक्रम की ‘की-नोट स्पीकर’ (मुख्य वक्ता) डॉ. दीप्ति चौहान ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से ग्रीन सोसाइटी अर्थात हरित समाज के लिए कबाड़ से जुगाड़ के माध्यम से विभिन्न रचनात्मक कार्य से परिचय कराया ।।

वाटर हार्वेस्टिंग, ग्रीनरी डेवलपमेंट, स्मार्ट सेंसर, हर्बल कलर निर्माण, पेस्टिसाइड निर्माण इत्यादि गतिविधियों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए इसके घरेलू उपयोग तथा व्यावसायिक पक्ष से भी अवगत कराया। छात्र-छात्राएं किस तरह प्रकृति और पर्यावरण को बचाते हुए वैज्ञानिक नवाचार के जरिए रोजगार के नये-नये अवसर सृजित कर सकते हैं ? इस विषय पर उन्होंने अपनी बात रखी। विशिष्ट अतिथि जे.के. वैष्णव पूर्व छात्रसंघ प्रभारी ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और विज्ञान के सह-अस्तित्व की वकालत करते हुए पर्यावरण संरक्षण को रेखांकित करते हुए आज की अनिवार्य आवश्यकता बताया । 16 सितम्बर को ओजोन दिवस एवं पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाने को इस दिशा में एक बड़ा कदम कहा। इस सत्र का संचालन यशपाल जंघेल और आभार प्रदर्शन सुरेश आडवाणी ने किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना कार्यशाला की संयोजक मनीषा नायक ने किया।।

द्वितीय तकनीकी में आमंत्रित वक्ता हड्डी रोग विशेषज्ञ देवरी निवासी वैद्य श्री शेखू राम वर्मा उपस्थित थे।। उन्होंने आयुर्वेद को भारत की ज्ञान परम्परा का संवाहक घोषित करते हुए हड्डी जोड़ने की चिकत्सीय पद्धति में स्थानीय जड़ी- बूटी के महत्व रेखांकित किया।।इसके अलावा उन्होंने स्वस्थ्य जीवन शैली के लिए आवश्यक खानपान के बारे में प्रतिभागियों को अवगत कराया।

पैनल डिस्कशन में कुलीकसा निवासी नाड़ी रोग विशेषज्ञ वैद्य सुमरन जंघेल और नर्व विशेषज्ञ भोरमपुर निवासी वैद्य जगदीश चंदेल विशेष रूप से उपस्थित थे जिन्होंने स्थानीय जड़ी बूटियों के माध्यम से बड़े से बड़े रोगों के निदान का उपाय बताया। उन्होंने बताया कि किस तरह हम अपनी परंपरागत अर्जित ज्ञान से दुस्साध्य रोगों का निदान कर सकते हैं।।इस सत्र का संचालन डॉ. उमेंद चंदेल और आभार प्रदर्शन सृष्टि वर्मा ने किया।

कार्यशाला को सुचारू रूप से संचालित करने में सचिव सहायक प्राध्यापक भबीता मंडावी, सतीश माहला, मोनिका जत्ती, अतिथि व्याख्याता परमेश्वरी टांडिया, शबाना खान, खेमपाल, ऐश्वर्या वर्मा, राकेश वर्मा, निशा दुबे, अश्वनी वर्मा, खूशबू सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राध्यापक गण, शोध-छात्र, और स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के छात्र-छात्राएं पंजीयन कराएं और उपस्थित भी रहें।।

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