पावर हाउस ओवरब्रिज फिर बना ‘डेथ ज़ोन’, ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह फेल…
भिलाई/दुर्ग। नेशनल हाइवे 53 पर मौत ने फिर दस्तक दी और इस बार कीमत चुकानी पड़ी एक युवा, करियर में आगे बढ़ रही, जिम्मेदार बेटी को।
साक्षी द्विवेदी (28), राजनांदगांव के एबिस प्लांट में HR एग्जीक्यूटिव जीवन की राह में आगे बढ़ने वाली यह युवती आज भिलाई की ट्रैफिक अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई।
छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से पावर हाउस स्टेशन उतरने के बाद पिता के साथ बाइक से मायके लौट रही थीं। जैसे ही बाइक पावर हाउस ओवरब्रिज के ढलान से नीचे उतरी— पीछे से तेज रफ्तार ट्रेलर ने उन्हें रौंद दिया।
पिता दूर जा गिरे… और सड़क पर गिरी साक्षी को ट्रेलर के पहियों ने कुचल डाला।
मौके पर ही मौत। कोई मौका नहीं… कोई बचाव नहीं।
भिलाई की ट्रैफिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल— आखिर लोग कब तक मरते रहेंगे?
पावर हाउस ओवरब्रिज, जिसे शहर का सबसे संवेदनशील पॉइंट माना जाता है—
आज भी पूरी तरह असुरक्षित।
न ट्रैफिक नियंत्रण, न पुलिस की मौजूदगी, न रफ्तार पर कोई लगाम।
क्या ट्रैफिक विभाग सिर्फ चालान काटने के लिए है?
क्या किसी जिम्मेदार अफसर ने कभी यहां खड़े होकर हालात देखे भी हैं?
शहर में हर हफ्ते हादसे, मौतें, खून…
लेकिन प्रशासन की प्रतिक्रिया वही पुरानी—
- खानापूर्ति की कार्रवाई
- प्रेस नोट
- और फिर अगले हादसे का इंतज़ार
शहर फट पड़ा— “पावर हाउस ओवरब्रिज को कब सुरक्षित बनाया जाएगा? या फिर शवों की गिनती बढ़ती रहे?”
भिलाई के लोग गुस्से में हैं।
हर दिन हादसे… हर दिन खामोशी… हर दिन शहरवासियों की जान की कीमत पर सिस्टम की नींद।
शहरवासियों के चुभते सवाल—
- “ट्रैफिक पुलिस कहां थी?”
- “किसके भरोसे छोड़ दिया गया है ये हाईवे?”
- “ट्रेलरों पर कोई निगरानी क्यों नहीं?”
सोशल मीडिया में भी आज एक ही आवाज़—
“भिलाई को मौत के खेल से बचाओ… ये शहर कब तक खामोश रहेगा?”
टूट गया एक परिवार, खत्म हो गया एक उज्ज्वल भविष्य
साक्षी सिर्फ एक नाम नहीं—
वो अपने परिवार का सहारा थीं, पिता की आँखों का सपना, और करियर की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही एक युवा प्रोफेशनल।
मायके की दहलीज पार करने से पहले ही मौत ने उन्हें लील लिया।
उनके परिवार की चीखें और पिता का सदमा इस बात का दर्दनाक प्रमाण है कि—
भिलाई की सड़कों पर अब सुरक्षित लौटना भी किसी चमत्कार से कम नहीं।
यह हादसा नहीं, यह सिस्टम की विफलता का ‘पोस्टर’ है
- पावर हाउस ओवरब्रिज को तुरंत
- हाई-रिस्क ज़ोन घोषित किया जाए
- भारी वाहनों पर सख्त निगरानी लागू हो
- 24×7 ट्रैफिक पुलिस की तैनाती हो
- CCTV, रफ्तार-नियंत्रण और प्रतिबंधित समय लागू किया जाए
अगर यह कदम नहीं उठाए गए तो भिलाई को अगली साक्षी द्विवेदी के मरने का इंतज़ार करना पड़ेगा— और यह शहर कभी माफ नहीं करेगा।
यह खबर सिर्फ रिपोर्ट नहीं — सिस्टम को जगाने की चेतावनी है।
