Thursday, January 15, 2026

पंथी के पथिक मिलाप दास बंजारे! लोकनृत्य से इंटरनेशनल पहचान बनाने वाले कलाकार का दर्द…

दुर्ग/भिलाई। छत्तीसगढ़ की माटी से उठकर अपनी कला से पूरे देश और दुनिया में राज्य का नाम रोशन करने वाले पंथी नर्तक मिलाप दास बंजारे आज बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। कभी मंचों पर नृत्य के माध्यम से भगवान घासीदास के संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने वाले इस कलाकार की जिंदगी अब मुफलिसी में बीत रही है।

1987 में रूस तक पहुंचाई थी पंथी की गूंज
मिलाप दास बंजारे ने 1987 में रूस के कई शहरों में पंथी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी थी। वहां छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली। इस प्रस्तुति के बाद उन्हें “पंथी के पथिक” कहा जाने लगा।

अब जिंदगी में अंधेरा…
वक्त ने करवट ली और बीमारी ने इस कलाकार को तोड़कर रख दिया। मधुमेह की गंभीर बीमारी के चलते उनका एक पैर काटना पड़ा। आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वे नकली पैर लगवाने की भी सामर्थ्य नहीं रखते। घर की हालत ऐसी है कि दवा और इलाज के लिए भी दूसरों की मदद पर निर्भर हैं।

सरकार और समाज से मदद की उम्मीद
मिलाप दास बंजारे अब मुख्यमंत्री और संस्कृति विभाग— रिपोर्ट: मोरज देशमुख से सहायता की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार थोड़ी सी मदद कर दे, तो वे फिर से खड़े होकर युवाओं को लोकनृत्य की शिक्षा दे सकते हैं।

छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का सच्चा सपूत
जिस कलाकार ने अपने नृत्य से छत्तीसगढ़ का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया, आज वही मदद का मोहताज है। यह न केवल एक कलाकार की पीड़ा है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत पर भी प्रश्नचिह्न है कि क्या हम अपने सच्चे सपूतों का सम्मान कर पा रहे हैं?

अब जरूरत है संवेदनशीलता की।
सरकार और समाज अगर आगे आए, तो मिलाप दास जैसे कलाकार फिर से कला की लौ जलाकर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दे सकते हैं।

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