आर्य समाज ढाई सौ युवतियों को सनातन धर्म की रक्षा के लिए तैयार कर रहा है आर्य वीर दल प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से
भिलाई आर्य समाज मंदिर सेक्टर 6 में स्वामी श्रद्धानंद जी का 99वाँ बलिदान दिवस श्रद्धा, संकल्प और राष्ट्रचेतना के साथ आयोजित हुआ। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। इस अवसर पर आर्य जगत के क्रांतिकारी विद्वान आचार्य योगेश भारद्वाज का ओजस्वी आगमन हुआ, जिसमें आर्य समाज सहित विभिन्न सनातनी संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। आर्य समाज की ओर से छत्तीसगढ़ प्रांतीय आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री अवनी भूषण पुरंग, प्रसिद्ध उद्योगपति उमेश चितलंगिया एवं धर्म जागरण समन्वय से राजकुमार चंद्रा की विशेष उपस्थिति रही।
आचार्य योगेश भारद्वाज ने अपने प्रवचन में स्वामी श्रद्धानंद जी द्वारा चलाए गए शुद्धि आंदोलन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए दलितोद्धार, हिंदी आंदोलन, सामाजिक सुधार, गुरुकुल आंदोलन, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान तथा उनके क्रांतिकारी व्यक्तित्व को सशक्त उदाहरणों सहित प्रस्तुत किया। उन्होंने स्वामी जी की सादगी, सर्वस्व दान और उस ऐतिहासिक प्रसंग का भी उल्लेख किया, जिसने मूलचंद नास्तिक को आस्तिक एवं संन्यासी स्वामी श्रद्धानंद के रूप में राष्ट्र को समर्पित कर दिया। कार्यक्रम का संचालन अंकित शास्त्री ने किया।
कार्यक्रम में सभा के उपप्रधान रामनिवास गुप्ता, उपप्रधान रवि आर्य, दिलीप आर्य, अजय आर्य, विक्रम आर्य, महेश नायडू, रजनीश मल्होत्रा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।

योगेश भारद्वाज के क्रांतिकारी प्रवचनों से उद्वेलित हुआ हिंदू समाज
अपने विचार रखते हुए आचार्य योगेश भारद्वाज ने कहा कि विश्व का श्रेष्ठ धर्म वैदिक सनातन धर्म है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इस भूमि को अपनी पुण्यभूमि, धर्मभूमि और कर्मभूमि मानना होगा, तभी राष्ट्र के प्रति उसकी निष्ठा सुदृढ़ होगी। उन्होंने घर वापसी, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रवाद को सामाजिक समाधान के रूप में रेखांकित किया।
कार्यक्रम को लेकर डॉ अजय आर्य ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का जीवन आज के समय में युवाओं के लिए प्रेरणा-पुंज है। उनका बलिदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक है। आचार्य योगेश भारद्वाज के प्रवचनों ने समाज को आत्मचिंतन और आत्मगौरव का बोध कराया है। डॉ अजय आर्य ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में वैचारिक स्पष्टता, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति दायित्व की भावना मजबूत होती है, जो स्वामी श्रद्धानंद जी के सपनों का भारत निर्मित करने की दिशा में सार्थक कदम है।
प्रमुख बिंदु देश का गौरवशाली इतिहास पढ़ाया जाए। बच्चों को सिख गुरुओं का बलिदान पढ़ाया जाए। हीरो का इतिहास पढ़ाया जाए महाराणा प्रताप ने कैसे एक बार से बिलावल खान सहित घोड़े के दो टुकड़े कर दिए थे यह इतिहास बच्चों को पढ़ाया जाए तो बच्चे वीर बनेंगे। इतिहास की गौरवशाली परंपरा को शिकाया गया है। आजादी चरखे और सूट से नहीं भगत सिंह क्रांतिकारी और दयानंद के विचारों से मिली थी।