ग्रामीणों से शांति की अपील, हिंसा समस्या का समाधान नहीं, शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन ही एक मात्र विकल्प ।
रायगढ़। जिले के तमनार ब्लॉक में जिंदल कंपनी को आवंटित गारे पेलमा 1 कोल ब्लॉक की फर्जी पर्यावरणीय जनसुनवाई को निरस्त करने की माँग पर कई दिनों से CHP चौक, तमनार में जारी शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन आंदोलन में आज हुई हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने इसके लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया । जानकारी के मुताबिक धरना स्थल से ग्रामीणों की गिरफ्तारी और कोयला परिवहन डंपर से दबकर हुई एक ग्रामीण की मौत के बाद तनाव की स्थिति पैदा हुई।
हिंसा का सहारा लेकर शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलना प्रशासन की रणनीति का हिस्सा रहा हैं। प्रदेश में हसदेव, अमेरा सहित विभिन्न स्थानों पर जबरन जमीन अधिग्रहण और जंगलों की अवैध कटाई के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर ग्रामीणों के बर्बर दमन की तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखी हैं।
छत्तीसगढ़ को चंद पूंजीपतियों की लूट का चरागाह बनाकर आदिवासी, किसानों से उनके आजीविका के संसाधनों जंगल – जमीन को छीना जा रहा है । इसके लिए सत्ता और कॉर्पोरेट का गठजोड़ मिलकर न सिर्फ फर्जी तरीके से जनसुनवाइयाँ आयोजित करवा रहा है बल्कि पेसा और वनाधिकार मान्यता क़ानून का उल्लंघनों कर संवैधानिक ग्रामसभाओं के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
प्रस्तावित गारे पेलमा 1 कोयला खदान प्रभावित सभी 14 गांव की ग्रामसभाएं खनन परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित कर शासन प्रशासन को सौंप चुके हैं बावजूद इसके एक बार निरस्त होने के बाद भी शासन ने भारी पुलिस बल लगाकर जबरन तरीके से फर्जी जनसुनवाई करवाई।

दिनांक 8 दिसंबर को हजारों की संख्या में लोग धौराभाटा हाई स्कूल मैदान में एकत्रित होकर जनसुनवाई का विरोध कर रहे थे । परंतु जिला प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने पूर्व निर्धारित स्थल के बजाए दूसरी जगह टेबिल कुर्सी लगाकर 15-20 लोगों की मौजूदगी में जनसुनवाई की खानापूर्ति करके चले गए । भारी पुलिस बल को तैनात करके किसी भी ग्रामीण, यहाँ तक कि जनप्रतिनिधि को जाने नहीं दिया ।
इस जनसुनवाई को निरस्त करने के लिए लगभग 15 दिनों से ग्रामीण शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे । राज्य सरकार ने आंदोलनरत ग्रामीणों की मांगों को अनसुना करके जनसुनवाई को निरस्त करने के लिए कोई भी पहल नहीं की । सरकार का यह रवैया दर्शाता है कि उन्हें आदिवासी किसानों से ज़्यादा पूंजीपतियों के मुनाफे की चिंता है । साय सरकार जनविरोध को कुचलकर कॉर्पोरेट की सेवा में लगी हुई है।
धरना स्थल पर की गई पुलिस कार्यवाही का छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन कड़ी भर्त्सना करते हुए फर्जी और अवैध जनसुनवाई को तत्काल निरस्त करने की मांग राज्य सरकार से करता है।
राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में इस तरह की दमनात्मक कार्यवाहियों को बंद कर संवैधानिक ग्रामसभाओं के निर्णयों का पालन करें।
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