समाजसेवियों ने बांटे कंबल और गर्म वस्त्र – ‘सेवा करने से मिलता है सच्चा आनंद’

दुर्ग। कड़ाके की ठंड को देखते हुए शहर के समाजसेवियों ने मिलकर कंबल और गर्म कपड़ों का जनसेवी वितरण अभियान संचालित किया। दुर्ग 5 बिल्डिंग, सेक्टर 6 आर्य समाज मंदिर, साईं मंदिर तथा आसपास के कई स्थलों पर पीड़ित और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुँचाई गई। इस अभियान का नेतृत्व समाजसेवी हेमा सक्सेना ने करते हुए सेवा को एक सतत जीवन-दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ‘मुझे यह कार्य करने की प्रेरणा और शक्ति डॉ. अजय आर्य से मिली है। उन्होंने मुझे सिखाया कि सेवा केवल कार्य नहीं, बल्कि मनुष्य के अस्तित्व का सबसे श्रेष्ठ उद्देश्य है।’ इस कार्यक्रम में आशुतोष सिंह और सतीश धीवर भी लगातार साथ रहे और वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाने में अहम भूमिका निभाई। अभियान में सहयोग करने वाले प्रमुख समाजसेवी रहे – प्रदीप यादव, नम्रता, प्रीति साहू, ओजस्वी सक्सेना, रेखा सिंह, आरती श्रीवास्तव, अल्पना त्रिपाठी, पूनम साहू और मनीषा शुक्ला, रचना पाल अनीता भारद्वाज, बाबू भाई, कौस्तुभ नायक – जिन्होंने न सिर्फ वस्त्र दान किए, बल्कि अपना समय, ऊर्जा और संवेदनशीलता भी समर्पित की। सभी ने कहा कि ‘सेवा भौतिक वस्तु का दान मात्र नहीं है, बल्कि किसी थके हुए जीवन में आशा की रोशनी जगाने का प्रयास है।

कार्यक्रम का अनुभव साझा करते हुए आशुतोष सिंह ने कहा कि ‘जब हम सेक्टर 6 नाले के पास कंबल दे रहे थे, वहाँ एक महिला को को हेमा सक्सेना ने कंबल दिया। उसने तुरंत उसे ओढ़ लिया और उसकी आँखों में जो तृप्त खुशी थी, वह शब्दों में नहीं बताई जा सकती। दोपहर के लगभग 3 बजे ही वह वही कंबल ओढ़े प्रसन्न दिखाई दी। हमने उसके साथ एक फोटो भी खिंचवाई – वह मुस्कान हमारे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार थी।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘अमीर वह नहीं है जो महंगे कपड़े पहनकर और अपने ऊपर लाखों खर्च करके खुद को बड़ा बताता है। वास्तविक अमीरी वह है जो दूसरे के दुख को समझे, उसके दर्द को कम करे और उसकी मजबूरी और ठंड को समझ कर थोड़ा गर्म, थोड़ा सुरक्षित बना कर राहत दे।

डॉ. अजय आर्य ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ‘परोपकार से मन शांत होता है और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए अच्छे कार्य का समय हमेशा यही वर्तमान होता है। यदि हम अपने जीवन का केवल एक प्रतिशत समय भी समाज के लिए दें, तो दुनिया स्वभावतः सुंदर हो सकती है। जब भी मैं कोई सेवा अभियान शुरू करता हूँ, मेरे मित्र स्वयं आगे बढ़कर कहते हैं – हमें बताइए, हमें क्या करना है। यह बताता है कि दुनिया केवल अच्छी ही नहीं, बल्कि उसे अच्छा बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। भारतीय वैदिक संस्कृति तो हमें सदैव दूसरों के कल्याण के लिए प्रेरित करती है।’ अभियान में शामिल सभी समाजसेवियों की प्रेरणा, संवेदना और मानवीय दृष्टि ने सिद्ध किया कि सामूहिक सेवा केवल राहत प्रदान करने का कार्य नहीं, बल्कि मानवता की वैश्विक संस्कृति का विस्तार है। जिन्होंने अपने श्रम, समय, संसाधन और करुणा से इस अभियान को सफल बनाया, वे सचमुच समाज की नैतिक शक्ति और मानवता के वास्तविक दूत हैं।

Exit mobile version