छत्तीसगढ़ SIR सचेतन मताधिकार बचाओ मंच द्वारा आज एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें बताया गया कि मंच के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त यशवंत जी एवं पी. एस .ध्रुव से भेंट कर SIR प्रक्रिया में आ रही गंभीर समस्याओं से अवगत कराया।
मंच ने आयुक्तों के समक्ष निम्न प्रमुख मुद्दे उठाए—
- महिलाओं को आवश्यक दस्तावेज़ जुटाने में अत्यधिक कठिनाइयाँ आ रही हैं, जिसके कारण वे समय पर SIR प्रक्रिया पूर्ण नहीं कर पा रही हैं।
- SIR की समय-सीमा को कम से कम 6 माह के लिए बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी मतदाता का नाम सूची से छूटने न पाए।
- कई क्षेत्रों में B.L.O. द्वारा गलत तरीके से फार्म भरवाए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
- बस्तर, जशपुर जैसे दुर्गम व आदिवासी इलाकों में रहने वाले मतदाताओं तक फार्म पहुँचाने और भरवाने में भारी चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।
बैठक के दौरान आयुक्तों ने स्पष्ट किया कि 2003 की मतदाता सूची में जिनके नाम दर्ज हैं, उन्हें केवल सही फार्म भरना है, किसी अतिरिक्त दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पिता या दादा का 2003 का दस्तावेज़ उपलब्ध है, तो वह भी मान्य होगा।
इस पर मंच ने आयुक्त को अवगत कराया कि जमीन पर B.L.O. ऐसे मतदाताओं से भी दस्तावेज़ माँग रहे हैं, जिनका नाम 2003 की सूची में मौजूद है। इस पर आयुक्त ने स्वीकार किया कि शायद कुछ B.L.O. को उचित प्रशिक्षण नहीं मिल पाया है, और इस दिशा में सुधार किया जाएगा।
मंच ने यह भी चिंता व्यक्त की कि
“B.L.O. पर अत्यधिक लक्ष्य (टार्गेट) का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे गलतियाँ बढ़ रही हैं और आम नागरिकों का मताधिकार प्रभावित हो सकता है।”
मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह प्रक्रिया NRC जैसी जटिल होती जा रही है, जो अब SIR के रूप में लागू हो रही है। इसी कारण मंच द्वारा गाँव–गाँव में जाकर लोगों को सही जानकारी दी जा रही है और फार्म भरवाने में सहयोग किया जा रहा है।
मुख्य आयुक्त ने सुझाव दिया कि SIR की समय-सीमा बढ़ाने हेतु दिल्ली स्थित मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भी पत्र भेजा जाए। इस पर मंच ने आश्वस्त किया कि वे इस संबंध में तत्काल दिल्ली मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन प्रेषित करेंगे।
बैठक में मंच की ओर से
कल्याण पटेल, सक्सेना जी, आलोक जी, नारायण राव, निरा डेहरिया, भावना, संजना, संतोष कछवाहा पवन,कलादास डेहरिया, दिनेश
उपस्थित रहे।
मंच ने आशा व्यक्त की कि निर्वाचन आयोग द्वारा शीघ्र ही आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, ताकि किसी भी नागरिक का मताधिकार बाधित न हो।




