यतेंद्र जीत सिंह “छोटू” खैरागढ़: पुष्य नक्षत्र पर सन्नाटा पसरा, बाजार से रौनक गायब।। देशभर में दीपावली को सबसे बड़ा और सबसे रौनकभरा पर्व माना जाता है।। हर साल इस त्यौहार से पहले बाजारों में भीड़ उमड़ पड़ती है, दुकानों में ग्राहकों की लंबी कतारें लगती हैं और व्यापारियों के चेहरे पर रौनक दिखाई देती है।। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ और ही नजर आ रही है।। खैरागढ़ जिला मुख्यालय का बाजार दीपावली से महज कुछ दिन पहले भी सूना पड़ा है।।
पुष्य नक्षत्र पर सन्नाटा, ग्राहकों का नहीं दिखा जमावड़ा
मंगलवार 14 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र था, जिसे हर साल बेहद शुभ माना जाता है। परंपरा रही है,कि इस दिन लोग सोना-चांदी, वाहन या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदकर त्योहार की शुरुआत करते हैं।।बाजारों में इस दिन हमेशा चहल-पहल रहती थी, लेकिन इस बार पूरे खैरागढ़ बाजार में सन्नाटा पसरा रहा।। दुकानों में ग्राहक तो दूर, दिनभर व्यापारी खाली बैठे रहे।।
स्थानीय ज्वेलर्स और व्यापारी बताते हैं कि पहले पुष्य नक्षत्र पर उन्हें सांस लेने की भी फुर्सत नहीं होती थी परंतु इस बार पूरा दिन हाथ पर हाथ धरे बीत गया।। कई ग्राहक दुकानों तक आए जरूर, लेकिन बढ़े हुए दाम सुनकर बिना खरीदी किए ही लौट गए।।
सोने-चांदी के बढ़ते दामों से घटी चमक,सोना अब आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुका है
पिछले कुछ महीनों से सोने और चांदी के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं।। सोना अब आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुका है।। स्थानीय ज्वेलर्स का कहना है,कि महंगाई और अस्थिर बाजार के कारण ग्राहक अब जरूरत से ज्यादा सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं।। इससे आभूषण कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है।।

किसानों की फसल खराबी ने तोड़ी बाजार की रफ्तार
व्यापारी संघ अध्यक्ष व ललीत ज्वेलर्स के संचालक अशोक मुणोत ने बताया कि खैरागढ़ का बाजार पूरी तरह किसानों पर निर्भर है।। इस साल खरीफ सीजन में सोयाबीन की फसल खराब हो गई है, जिससे किसानों की आमदनी पर गहरा असर पड़ा है।। इसके अलावा, सरकार ने धान खरीदी की तारीख 1 नवंबर से बढ़ाकर 15 नवंबर कर दी है।। इसका असर यह हुआ है, कि किसानों के पास इस समय नकदी की भारी कमी है ।। जब किसानों के पास पैसा ही नहीं है तो वे त्योहार की खरीदी कैसे करेंगे सोने-चांदी के दाम आसमान छू रहे हैं, बाजार मंदा है और व्यापारी दिनभर ग्राहकों के इंतजार में बैठे रहते हैं।। ऐसे हालात पहले कभी नहीं देखे।।
राजनीति में भी गूंजा बाजार का सन्नाटा
बाजार की इस मंदी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।। कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद प्रतिनिधि कपिनाथ महोबिया ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब प्रदेश में भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार थी, तब किसानों को दीपावली से पहले धान बोनस और राजीव गांधी किसान न्याय योजना की किश्त मिल जाती थी।। इससे किसानों के हाथ में पैसा आता था और बाजार में स्वाभाविक रौनक रहती थी।।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आने के बाद किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई है।। साथ ही, बिजली बिल हाफ योजना को बंद कर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है।। उन्होंने कहा, “आज आम आदमी का बिजली बिल पहले से दोगुना आ रहा है।। ऐसे में लोग त्योहार की खरीदी से पहले अपने खर्चों को लेकर परेशान हैं।।
सत्ता पक्ष का दावा और हकीकत में अंतर
वहीं सत्ता पक्ष में बैठे नेता इस मंदी को स्वीकार नहीं करते।। उनका कहना है कि जीएसटी दरों में कमी और व्यापारिक नीतियों में सुधार के कारण बाजार में तेजी आई है।। मगर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।।
व्यापारी और आम लोग कहते हैं कि सरकार के ये दावे कागज़ी हैं “हकीकत यह है कि दुकानदार खाली बैठे हैं और ग्राहक महंगाई से परेशान हैं।”
दीपावली नजदीक, लेकिन रौनक गायब
दीपावली का त्यौहार अब बस कुछ ही दिनों की दूरी पर है, लेकिन खैरागढ़ का बाजार अब भी अपनी पुरानी चमक वापस नहीं पा सका है।। दुकानदारों को उम्मीद है,कि आने वाले दिनों में ग्राहक लौटेंगे और त्योहार की रौनक फिर से बाजारों में दिखेगी।। फिलहाल, पुष्य नक्षत्र जैसे शुभ दिन पर भी बाजार का सन्नाटा यह साफ संकेत देता है,कि महंगाई, फसल नुकसान और आर्थिक सुस्ती ने लोगों की क्रयशक्ति को कमजोर कर दिया है।। दीपों का पर्व करीब है,पर इस बार व्यापारियों के चेहरों की चमक फीकी पड़ गई है।।




