दुर्ग।
नगपुरा में आयोजित शिव कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण और भी गहन हो गया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस पावन आयोजन के मुख्य यजमान सरोज रिंगारी जी एवं भूपेद रिंगारी रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में नगपुरा सरपंच सोमेश्वर यादव, सरपंच संघ अध्यक्ष राजू यादव, प्रेमलता यादव, जूही संजय चौबे एवं प्रिया साहू (संयोजक, नगपुरा–दुर्ग) की विशेष सहभागिता रही।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय ने व्यास पीठ पर पधारकर कथा श्रवण किया, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई। श्रद्धालुओं ने उनके आगमन का आत्मीय स्वागत किया।

तीसरे दिन की कथा में कथावाचक ने भगवान शिव के पुत्र और पुत्री के स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शिव परिवार केवल देवताओं का परिवार नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए आदर्श परिवार है। शिव के पुत्र गणेश बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं, वहीं पुत्री के रूप में शक्ति का स्वरूप जीवन को संतुलन प्रदान करता है।
कथा में यह भी बताया गया कि वायु देव स्वयं भगवान शिव की शक्ति के रूप में कार्य करते हैं। जिस प्रकार वायु के बिना जीवन संभव नहीं, उसी प्रकार शिव की शक्ति के बिना सृष्टि का संचालन नहीं हो सकता। शिव और शक्ति का यह समन्वय ही संसार को गतिमान रखता है।

कथावाचक ने श्रद्धालुओं को यह गूढ़ संदेश दिया कि भगवान शिव को पाने के लिए धन-संपत्ति आवश्यक नहीं होती। आपके पास माल हो या न हो, यदि मन में सच्ची श्रद्धा, विश्वास और भक्ति है, तो महादेव सहज ही प्राप्त हो जाते हैं। शिव को पाने के मार्ग अनेक हैं—सेवा, सत्य, संयम, करुणा और भक्ति—इनमें से किसी एक मार्ग पर भी सच्चे भाव से चलें, तो शिव कृपा अवश्य मिलती है।
तीसरे दिन की कथा ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिव भक्ति किसी वर्ग या सामर्थ्य की मोहताज नहीं, बल्कि यह हृदय की पवित्रता और भाव की सच्चाई पर आधारित है। कथा के समापन पर पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठे।

कथा के दौरान कथावाचक ने श्रद्धालुओं को आस्था का गूढ़ मंत्र देते हुए कहा—
“देवता देता है पल्ला झाड़कर, मेरा कुबेर भंडारी देता है।”
अर्थात संसार के देवता सीमित रूप में कृपा करते हैं, किंतु महादेव अपने भक्त को बिना हिसाब, बिना भेदभाव और बिना शर्त के देते हैं। शिव भक्ति में कोई कमी नहीं, कोई गणना नहीं—बस सच्चा भाव होना चाहिए।
महादेव को कुबेर भंडारी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे केवल धन ही नहीं, बल्कि सुख, शांति, स्वास्थ्य, धैर्य और सद्बुद्धि का भंडार भी अपने भक्तों को प्रदान करते हैं। जो भक्त निस्वार्थ भाव से शिव की आराधना करता है, उसके जीवन में अभाव टिक नहीं पाता।
कथावाचक ने यह भी कहा कि शिव देने से पहले यह नहीं देखते कि भक्त के पास क्या है, बल्कि यह देखते हैं कि भक्त के हृदय में क्या भाव है। इसलिए कहा गया है—
जिसके सिर पर महादेव का हाथ हो, उसके भाग्य को कोई नहीं रोक सकता।




