रानी अवंती बाई सरोवर पर भू-माफियाओं का साया, विधायक रिकेश ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, कहा – धरोहर को बचाना जरूरी

​भिलाई नगर। जल ही जीवन है—यह पंक्ति कागजों पर तो सुंदर लगती है, लेकिन धरातल पर जब स्वार्थ और लालच का मेल होता है, तो सबसे पहले जल के स्रोत ही बलि चढ़ते हैं। भिलाई के जुनवानी रोड कोहका स्थित रानी अवंती बाई सरोवर वर्तमान में इसी संकट से जूझ रहा है। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने इस सरोवर को संरक्षित करने और तालाब की जमीन को लेकर किए जा रहे दावों की उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच करने की मांग मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की है।

बिल्डरों की ‘निजी जमीन’ का खेल और अदालती दांवपेच
​अक्सर देखा गया है कि ऐतिहासिक तालाबों और सरोवरों को पहले ‘निजबारी’ या ‘निजी जमीन’ घोषित करा कर उनके अस्तित्व को मिटाने की कोशिश की जाती है। कोहका के इस सरोवर के साथ भी कुछ ऐसा ही खेल खेला जा रहा है। मामला न्यायालय तक पहुँचा, लेकिन अब जब बिल्डरों और भू-माफियाओं की सक्रियता फिर से बढ़ी है, तो स्थानीय जनता और पर्यावरण प्रेमियों में भारी चिंता है।

विधायक रिकेश सेन की मुहिम : विरासत बचाने की जंग
​वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है। उनका तर्क स्पष्ट है कि जल स्रोतों का संरक्षण केवल विकास नहीं, बल्कि भविष्य के लिए जीवन सुनिश्चित करना है। विधानसभा में भी उन्होंने शासकीय जमीनों के संरक्षण का मुद्दा उठाया था, जो यह दर्शाता है कि वे इस धरोहर को बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

सेन ने कहा कि ​​तालाब के आस-पास की जमीन का सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड की जांच अब अनिवार्य हो गई है। यदि समय रहते मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो भू-माफिया इस सरोवर को कंक्रीट के जंगल में तब्दील करने में देर नहीं करेंगे। कोहका के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों के लिए रानी अवंती बाई सरोवर केवल पानी का गड्ढा नहीं, बल्कि उनकी परंपराओं का हिस्सा है। यदि आज यह तालाब मिट गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की बूंद-बूंद का संकट खड़ा हो जाएगा। इसलिए तालाब की जमीन को लेकर हो रहे दावों की निष्पक्ष जांच कर सरोवर संरक्षण के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

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