मृत्यु संस्कार, कार्यक्रम से जीवन की अगली शरीर यात्रा सुखद होती है

मृत्यू संस्कार कार्यक्रम में नवीन पहल पर गोष्ठी आयोजित

भिलाई। भिलाई दुर्ग-मृत्यु संस्कार कार्यक्रम के संबंध में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही पटेवा के संचालक शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने वर्तमान मृत्यु संस्कार कार्यक्रमों में आवश्यक सुधार हेतु महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए जैसे मृत व्यक्ति को एक से अधिक कफ़न न चढ़ायें,मृत शरीर को चढ़ाये , सारे कफ़न कपड़ों को जलाना पड़ता है, पहले जमाने में लोग ले जाते थे,

आजकल कोई नहीं ले जाता, पर्यावरण प्रदुषण बस करता है,मृत व्यक्ति को श्रीफल समर्पित करें,जिसे बाद में प्रसाद के रूप में सभी का सकते हैं, नारियल को शव के साथ जलाने से भी हवा शुद्ध होता है,मृत व्यक्ति के दशगात्र, दशकर्म, मृत्यु भोज का भोजन सादा,सरल हो,न कि विभिन्न गरीष्ठ पकवानों से भरा हुआ,मृत व्यक्ति के शुभ -अशुभ,मंगल-अमंगल, उचित -अनुचित, न्याय -अन्याय, व्यवस्था -अव्यवस्था संबंधी कार्यों का सभा के माध्यम से परिवार जनों द्वारा स्मरण किया जाये, इससे मृत जीवन को नवीन संस्कार धारण करने में सुविधा होती है,

बढ़िया प्रेरणा दायी गीत,शरीर की नश्वरता और जीवन की अमरता पर संवाद किया जाये,सभा में उपस्थित सभी सज्जन अपने ‌शरीर यात्रा की उपलब्धियों पर संवाद करें, उन्होंने अभी तक क्या सार्थक और क्या निर्रथक कार्य किया,श्री कोकडिया के अनुसार स्वाभाविक मृत्यु एक उत्सव है, क्योंकि वर्तमान शरीर पूरा जर्जर हो गया है, इसीलिए जीवन इस शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करने के लिए शरीर का त्याग करता है, उसके नवीन शरीर धारण करने के लिए हम उनके सहयोगी बनें, इसके लिए मृत्यु संस्कार कार्यक्रम आयोजन अनिवार्य है,

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