राजनांदगांव। एक ओर सरकार जल संरक्षण के लिए ‘अमृत सरोवर’ और ‘नरवा-गरवा’ जैसी योजनाएं चलाकर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं संस्कारधानी राजनांदगांव में नगर पालिक निगम की उदासीनता के चलते शहर के पारंपरिक जल स्त्रोत—कुएं और तालाब—अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। आरटीआई (RTI) से प्राप्त चौंकाने वाले दस्तावेज यह तस्दीक करते हैं कि जो जल स्त्रोत सरकारी फाइलों में दर्ज हैं, वे जमीनी हकीकत में गायब हो चुके हैं या अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं।
दस्तावेजों में आंकड़ों का मायाजाल
नगर पालिक निगम राजनांदगांव के जल विभाग द्वारा जारी वार्डवार सूची (पत्र क्रमांक 701/जल/2025-26) में शहर के विभिन्न वार्डों में कुओं, तालाबों, हैंडपंपों और सिंटेक्स टंकियों की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त दी गई है। उदाहरण के तौर पर:
तिलक वार्ड (27): यहाँ 4 तालाब और 1 सार्वजनिक कुआं दर्ज है।
विवेकानंद वार्ड (28): यहाँ 1 तालाब और 1 सार्वजनिक कुआं कागजों में जीवित है।
रानी सूर्यमुखी देवी वार्ड (26): यहाँ भी कुओं की जानकारी विभाग द्वारा प्रेषित की गई है।
लेकिन स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इनमें से अधिकांश स्थान अब केवल नाम के रह गए हैं। धरातल पर कई कुओं को पाटकर निर्माण कर लिया गया है, तो कई तालाब कचरे के ढेर और झाड़ियों में तब्दील होकर भू-माफियाओं के निशाने पर हैं।
प्रशासन और पार्षदों की ‘मौन’ सहमति?
यह विडंबना ही है कि वार्ड के निर्वाचित पार्षद और निगम के आला अधिकारी रोज़ाना इन क्षेत्रों से गुजरते हैं, फिर भी सार्वजनिक संपत्तियों की बर्बादी पर मौन साधे हुए हैं। जिला प्रशासन की उदासीनता का आलम यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज खसरा नंबरों पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) नहीं किया जा रहा है।

सवाल उठता है कि:
अगर कागजों में कुएं और तालाब दर्ज हैं, तो वे धरातल पर क्यों नहीं दिखते?
क्या निगम के अधिकारियों ने जानबूझकर इन संपत्तियों को ‘लावारिस’ छोड़ दिया है ताकि भू-माफिया उन पर कब्जा कर सकें?
हैंडपंपों और सिंटेक्स टंकियों के रखरखाव के नाम पर हर साल होने वाला बजट कहाँ खर्च हो रहा है?
खतरे में जल स्तर
एक तरफ राजनांदगांव भीषण गर्मी में जल संकट से जूझता है, वहीं दूसरी ओर जल पुनर्भरण (Water Recharge) के इन प्राकृतिक माध्यमों को खत्म किया जा रहा है। यदि समय रहते इन कुओं और तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कर पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में शहर का भू-जल स्तर पाताल में चला जाएगा।
”नगर निगम द्वारा आरटीआई में जो जानकारी दी गई है, वह केवल दफ्तरी खानापूर्ति नजर आती है। रानी सूर्यमुखी देवी वार्ड सहित कई वार्डों में कुओं का अस्तित्व संकट में है। यदि प्रशासन ने जल्द सर्वे नहीं कराया, तो यह भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला बन सकता है।”विशेष पड़ताल: कागजों में सिमटा राजनांदगांव का जल स्त्रोत; क्या भू-माफिया और प्रशासन की मिलीभगत से गायब हुए कुएं और तालाब?





