रेलवे जानबूझ कर छिपा रहा है भिलाई का ऐतिहासिक तथ्य, प्रधम प्रधानमंत्री और प्रथम राष्ट्रपति की यादों से जुड़े तथ्यों का भिलाई नगर रेलवे स्टेशन में कहीं उल्लेख ही नही है….

यहां लगाए गए डिस्प्ले बोर्ड में भी कई गलतियां है, जो रेलवे की घोर लापरवाही है।

बोर्ड में गलतियां…

भिलाई, दुर्ग। डिस्प्ले बोर्ड की शुरूआती लाइन में .1888 में भिलाई नगर रेलवे स्टेशन की शुरूआत बताई गई है, जो पूरी तरह गलत है। वास्तविकता यह है कि 1888 में राजनांदगांव से रायपुर तक रेलवे लाइन बिछाई जा चुकी थी लेकिन यहां तब के सुपेला गांव में कोई रेलवे स्टेशन अस्तित्व में नहीं आया था…

इस बोर्ड में 1972 में मैत्री बाग का उद्घाटन बताया जा रहा है जबकि 1972 में मैत्री बाग शुरू हुए 10 साल हो चुके थे और 1972 में चिड़ियाघर चालू हुआ है न कि मैत्री बाग।

सबसे बड़ी या जानबूझकर की गई चूक यहां यह है कि यहां प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति उतर चुके हैं लेकिन इस बात का कहीं उल्लेख नहीं है।

16 दिसंबर 1957 को प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, बर्मा के प्रधानमंत्री उ नू और 14 वर्ष के राजीव गांधी राउरकेला से ट्रेन में सवार होकर इसी रेलवे स्टेशन पर उतरे थे तब इसे सुपेला रेलवे स्टेशन कहा जाता था।

इसी तरह 4 फरवरी 1959 की सुबह देश के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद भी राउरकेला से ट्रेन के सफर में आकर इसी रेलवे स्टेशन पर विशेष ट्रेन से उतरे थे और उन्होंने भिलाई की पहली ब्लास्ट फर्नेस का उद्घाटन किया था।

यह दोनों ऐतिहासिक तथ्य भी डिस्प्ले बोर्ड से गायब है और सुपेला से भिलाई नगर रेलवे स्टेशन का नाम कब बदल कर भिलाई नगर किया गया इसका भी उल्लेख नहीं है।

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