14 गांवों के धरने को कुचलने का आदेश किसने दिया?
(आलोक तिवारी)
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जो हुआ, वह सिर्फ एक कानून-व्यवस्था की घटना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अदूरदर्शिता, गलत फैसलों और सत्ता–संपर्कों का खतरनाक नतीजा है। सवाल सीधा है — जब हालात संभाले जा सकते थे, तब उन्हें बिगाड़ने की इजाजत किसने दी?
कई दिनों से 14 गांवों के ग्रामीण क्रमिक धरने पर बैठे थे। विरोध फैक्टरी के खिलाफ था, लेकिन प्रशासन जानता था कि तनाव के बावजूद स्थिति नियंत्रण में है। फैक्टरी का दूसरा गेट खुला था, वहां से वाहनों की आवाजाही जारी थी।
फिर अचानक मेन गेट पर बैठे ग्रामीणों को हटाने का आदेश आया।
यह आदेश किसने दिया?
बिना तैयारी पुलिस को क्यों झोंका गया?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि —
बिना पर्याप्त पुलिस बल,
बिना बॉडी प्रोटेक्शन,
बिना महिला बल की पर्याप्त व्यवस्था,
बिना वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
पुलिस को सीधे भीड़ के सामने क्यों भेजा गया?
क्या यह लापरवाही थी या जानबूझकर किया गया प्रयोग, जिसमें फील्ड में खड़े जवानों को ढाल बना दिया गया?
महिला आदिवासी दौड़ा रही थीं TI, महिला आरक्षक से बदसलूकी — और अफसर?

घटना के वीडियो और चश्मदीदों के बयान डराने वाले हैं —
महिला आदिवासी प्रदर्शनकारी TI को दौड़ाते नजर आए
महिला आरक्षक के साथ बदसलूकी हुई
पुलिस बल तितर-बितर होता दिखा
लेकिन उसी वक्त सवाल उठता है —
एसडीओपी कहां थे?
एडिशनल एसपी क्यों नदारद थे?
अनुविभागीय दंडाधिकारी मौके पर क्यों नहीं थे?
आरोप है कि जिले के जिम्मेदार अधिकारी उसी कंपनी के गेस्ट हाउस में बैठे थे, जिसके खिलाफ ग्रामीण आंदोलन कर रहे थे।
क्या यह संयोग है या सिस्टम की सच्चाई?
संवाद छोड़कर टकराव क्यों चुना गया?
जब भारी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और आदिवासी सड़क पर थे, तब प्रशासन के पास विकल्प थे —
बैक-चैनल बातचीत
गांव के बुजुर्गों से संवाद
धरना स्थल पर प्रशासनिक मौजूदगी
लेकिन संवाद नहीं, कार्रवाई चुनी गई।
और वही कार्रवाई इस पूरे घटनाक्रम को हिंसा की आग में झोंक गई।

हिंसा गलत, लेकिन जिम्मेदारी से भागना और भी गलत
यह साफ है कि —
पुलिस पर हमला
आगजनी
महिला पुलिसकर्मी से बदसलूकी
किसी भी हाल में जायज़ नहीं है।
लेकिन सवाल यह भी है कि —
हालात को वहां तक पहुंचाया किसने?
गलत समय पर गलत फैसला किसका था?
अगर निर्णय लेने वाले अफसर सुरक्षित कमरों में बैठेंगे और सड़क पर खड़े जवान और ग्रामीण आमने-सामने मरेंगे, तो यह सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता है।
कटघरे में पूरा सिस्टम
कटघरे में क्यों
जिला प्रशासन संवाद में विफलता
पुलिस प्रबंधन बिना तैयारी कार्रवाई
कंपनी प्रबंधन धरने के बावजूद दबाव
वरिष्ठ अधिकारी मौके से दूरी
अब सवाल नहीं, जवाब चाहिए
अब सिर्फ जांच से काम नहीं चलेगा।
प्रदेश को जानना है —
धरना हटाने का आदेश किसने दिया?
किसके दबाव में कार्रवाई हुई?
क्यों वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं थे?
क्योंकि अगर आज भी जिम्मेदारी तय नहीं हुई, तो रायगढ़ कोई आखिरी घटना नहीं होगी।
रायगढ़ में लाठियां नहीं, फैसले फेल हुए हैं। और जब फैसले फेल होते हैं, तो खून सड़क पर बहता है।




