प्रधानमंत्री ने आर्य समाज के लोगों का स्वदेशी के लिए आह्वान किया
आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा- स्वामी दयानंद ने सनातन धर्म और मूल्य को पुनर्जीवित किया
छत्तीसगढ़ प्रांतीय आर्य प्रतिनिधि सभा दुर्ग भिलाई के अनेक प्रतिनिधि अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन और मानव सेवा के आर्य समाज के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। दिल्ली के जापानी पार्क रोहिणीपुरम में आर्य समाज की मानवसेवा को समर्पित 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति ने ऐतिहासिक वातावरण निर्मित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने व्याख्यान में कहा कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने भारतीय समाज को आत्मविश्वास, स्वदेशी चेतना और वैदिक दृष्टि दी उन्होंने अंधविश्वास, सामाजिक जड़ता और परतंत्रता को चुनौती दी आर्य समाज ने जो दीप जलाया था वही आज आत्मनिर्भर भारत के मार्ग को आलोकित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आर्य समाज का योगदान केवल धर्म में नहीं बल्कि राष्ट्रनिर्माण, शिक्षा, नारी उत्थान और मानव सेवा के हर क्षेत्र में है आज जब भारत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है तब हमें दयानंद सरस्वती के स्वदेशी राज्य सर्वोपरि के मंत्र को आत्मसात करना चाहिए।

इस अवसर पर भिलाई छत्तीसगढ़ के प्रख्यात वैदिक चिंतक और शिक्षाविद आचार्य डॉ अजय आर्य ने छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करते हुए कहा- स्वामी दयानंद सरस्वती ने ऐसे धर्म की स्थापना की थी जो अंधविश्वासरहित और ज्ञान आधारित हो सत्यार्थ प्रकाश के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया कि कोई भी व्यक्ति सनातन परंपरा पर प्रश्न नहीं उठा सकता क्योंकि उसका आधार तर्क वेद और विज्ञान है उन्होंने समाज को बंधनों से मुक्त कर आत्मस्वाभिमान की ज्वाला प्रज्वलित की। जात-पात के बंधनों को तोड़ने की उन्होंने कोशिश की। आचार्य डॉ आर्य ने कहा कि स्वामी दयानंद केवल आर्य समाज के संस्थापक नहीं थे बल्कि राष्ट्र स्वाभिमान के वैचारिक शिल्पकार थे उनका संदेश कालातीत है और आज भी भारत के लिए पथप्रदर्शक है।
कार्यक्रम स्थल दयानंद नगर को वैदिक संस्कृति की जीवंत छवि के रूप में सजाया गया है यहाँ लगातार 24 घंटे दिव्य अग्नि प्रज्वलित है और वेदमित्र निरंतर यज्ञ आहुति और वैदिक मंत्रोच्चार कर रहे हैं पूरा परिसर गुरुकुल स्वरूप धारण किए हुए है। महर्षि दयानंद की भव्य प्रतिमा, गौशाला, यज्ञशाला, सांस्कृतिक मंच बाल एवं महिला उत्थान केंद्र और वैदिक प्रदर्शनी स्थल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं महिलाओं द्वारा नारी शिक्षा और उत्थान पर वैदिक विचार गोष्ठियाँ आयोजित की जा रही हैं वहीं बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को जीवंत बना दिया है।
छत्तीसगढ़ से आए आर्य प्रतिनिधि राकेश दुबे राजेंद्र अग्रवाल अजय साहू और आचार्य सुरेश जोगीराम सहित अनेक विशिष्ट पदाधिकारी इस महासम्मेलन में भाग ले रहे हैं राज्य के विभिन्न जिलों से आए 200 आर्यवीर दलों ने अपने शारीरिक प्रदर्शन और अनुशासन से सभी का मन मोह लिया इस अवसर पर सार्वदेशिक आर्य पुरोहित सभा ने आचार्य डॉ अजय आर्य को स्कंधवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया उन्होंने भावुक स्वर में कहा- स्वामी दयानंद ने बताया था भारत वह पारसमणि है जिसे छूकर विश्व स्वर्ण समान बना स्वामी दयानंद के विचारों में आज भी मानवता को दिशा देने की शक्ति है।
चार दिवसीय इस विराट सम्मेलन में 40 देशों से आर्य प्रतिनिधि और 1000 से अधिक वैदिक विद्वान सम्मिलित हुए हैं एक लाख से अधिक श्रद्धालु इस आयोजन के साक्षी बने हैं 5000 युवा आर्यवीर एक साथ व्यायाम प्रदर्शन कर रहे हैं। महासम्मेलन का वातावरण वैदिक ऊर्जा राष्ट्रभक्ति और सनातन स्वाभिमान के उद्घोष से गूंज उठा है आर्य समाज सेक्टर 6 भिलाई, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, अंबिकापुर सहित देशभर की संस्थाओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है।