रायपुर/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर में आयोजित 60वें अखिल भारतीय पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक सम्मेलन में भाग लेते हुए देश की पुलिस व्यवस्था को 21वीं सदी की आधुनिक, तकनीक-संचालित और जन-संवेदनशील दिशा देने का आह्वान किया।
तीन दिवसीय सम्मेलन का विषय — “विकसित भारत: सुरक्षा आयाम” — आने वाले दशकों के लिए भारत की सुरक्षा नीति का मूल आधार निर्धारित करने वाला माना जा रहा है।
यह जानकारी पीआईबी दिल्ली द्वारा 30 नवंबर 2025, शाम 5:17 बजे जारी प्रोमोशनल विज्ञप्ति में साझा की गई।
जनता और पुलिस के बीच की दूरी कम करनी होगी — प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस के प्रति जनता की पारंपरिक धारणाओं को बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं के साथ पुलिस की सकारात्मक और विश्वासपूर्ण छवि विकसित करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि—
- पेशेवरता, संवेदनशीलता और जवाबदेही पुलिस की कार्यशैली का आधार बने।
- शहरी पुलिस व्यवस्था को मजबूत किया जाए और
- पर्यटक पुलिस प्रणाली को पूरे देश में पुनर्गठित किया जाए।
उन्होंने नए आपराधिक कानून — भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) — के बारे में व्यापक जन-जागरूकता चलाने की आवश्यकता भी बताई।
टेक्नोलॉजी, AI और NATGRID से भविष्य की पुलिसिंग
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में देश की आंतरिक सुरक्षा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा इंटीग्रेशन और एनालिटिक्स पर आधारित होगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि—
- NATGRID के तहत उपलब्ध विशाल डेटा का अधिकतम उपयोग हो।
- इसे AI आधारित विश्लेषण से जोड़ा जाए ताकि कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी समय पर प्राप्त हो सके।
- निर्जन और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए नए रणनीतिक मॉडल विकसित किए जाएं।
प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को फोरेंसिक आधारित जांच पर केस स्टडी बढ़ाने हेतु प्रोत्साहित किया। उनका कहना था कि उच्च गुणवत्ता की फोरेंसिक जांच भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को विश्वस्तरीय बनाने का महत्वपूर्ण आधार है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर विस्तृत विचार-विमर्श
सम्मेलन में देश की सुरक्षा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई—
- विजन 2047 के लिए पुलिस रोडमैप
- आतंकवाद-निरोध और कट्टरपंथ-निरोध के नवीन रुझान
- महिला सुरक्षा में तकनीक की भूमिका
- विदेशों में रह रहे भगोड़ों को वापस लाने की रणनीति
- फोरेंसिक क्षमताओं को बढ़ाना
प्रधानमंत्री ने प्रतिबंधित संगठनों की निरंतर मॉनिटरिंग और वामपंथी उग्रवाद मुक्त क्षेत्रों के समग्र विकास पर भी जोर दिया।
आपदा प्रबंधन में तीव्र व समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता
चक्रवात दित्वा की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि—
- पुलिस और प्रशासन को वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करना होगा।
- चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिए मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र सुनिश्चित किए जाएं।
- जीवन बचाने और व्यवधान कम करने के लिए “Whole of Government Approach” अपनाना आवश्यक है।
पुलिस व्यवस्था को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप ढालना होगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि पुलिसिंग की शैली को विकसित राष्ट्र की आकांक्षाओं के अनुरूप पुनः व्यवस्थित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने पुलिस नेतृत्व से आग्रह किया कि—
“भारत के विकास के साथ पुलिस व्यवस्था भी आधुनिक, मजबूत और भविष्य उन्मुख बने।”
राष्ट्रपति पुलिस पदक एवं शहरी पुलिस व्यवस्था पुरस्कार प्रदान
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने—
- खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किए।
- साथ ही पहली बार स्थापित शहरी पुलिस व्यवस्था पुरस्कारों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन शहरों को सम्मानित किया।
इससे देश में नवाचार आधारित आधुनिक शहरी पुलिसिंग को बढ़ावा मिलेगा।
कौन रहे उपस्थित?
सम्मेलन में शामिल रहे—
- केंद्रीय गृह मंत्री
- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA)
- गृह राज्य मंत्री
- केंद्रीय गृह सचिव
- देशभर के DGP–IG, CAPF और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख
साथ ही देशभर के 700 से अधिक अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
