दुर्ग। पिसेगांव दुर्ग स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत विशेष शिविर का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। इस शिविर में भाग ले रहे छात्र-छात्राओं की दिनचर्या प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक निर्धारित की गई है। शिविर का उद्देश्य आत्मनिर्भर जीवन की भावना को व्यवहार में उतारना है, जिसके अंतर्गत छात्र स्वयं साफ-सफाई करते हैं, स्वयं भोजन पकाते हैं, स्वयं भोजन वितरित करते हैं और सामूहिक जीवन के अनुशासन को आत्मसात कर रहे हैं। यह शिविर विद्यार्थियों के भीतर सेवा, सहयोग, संयम और सामाजिक उत्तरदायित्व की चेतना को सुदृढ़ कर रहा है।
राष्ट्रीय सेवा योजना के कैंप में 50 से विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। यह विद्यार्थी ग्राम मीना जनता को नशा मुक्ति स्वच्छता पढ़ाई के महत्व आदि पर प्रभात फेरी निकालकर जागरूक कर रहे हैं। कार्यक्रम अधिकारी प्रो डॉ. चांदनी मरकाम अपने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहां कि जीवन में कठिनाई आती रहती है। इस कैंप में आने से हमने जीवन की कठिनाइयों को छोड़ दिया है।

आर्य समाज के नेतृत्व में राष्ट्रीय सेवा योजना के 20 विद्यार्थियों ने प्रोफेसर चांदनी मरकाम के मार्गदर्शन में ‘वस्त्र दान महादान – गर्माहट बांटे’ सेवा अभियान में सक्रिय सहभागिता की। इन सेवाभावी विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए आर्य समाज द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आचार्य डॉ. अजय आर्य ने छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए कहा कि आज का समाज स्वार्थ की ओर बढ़ रहा है, किंतु जब हम दूसरों के सुख-दुख की चिंता करते हैं, तभी मनुष्य जीवन सार्थक बनता है। सेवा ही वह साधना है, जो व्यक्ति को सच्चा मानव बनाती है। इस भाव को रेखांकित करते हुए कबीर का यह दोहा विशेष रूप से उद्धृत किया गया—
कबीर पर उपकार को, साधु कहावै कोय।
पर उपकार न कीजिए, तो साधु कहावै कोय
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने नृत्य एवं गीत की सशक्त प्रस्तुतियाँ दीं, जिससे शिविर स्थल उत्साह, ऊर्जा और सेवा-भाव से अनुप्राणित हो उठा।
आर्य समाज द्वारा सम्मानित विद्यार्थियों में तन्नु प्रिया साव, पलक सिंह राजपूत, डिकेश्वरी साहू, ख़ुशी सोनी, साक्षी साहू, काजल निषाद, रूपाली पटेल (बीए अंतिम वर्ष), हेमा पटेल, स्वाति साहू, जिज्ञासा चक्रधारी, अनु कर्मोकर, गायत्री सिक्का, रब्बिका बंजारे, वी. अंजलि, कुमकुम विश्वकर्मा, विधि साहू, नीलम चंद्रवंशी और अंशू मिश्रा शामिल हैं। इन सभी विद्यार्थियों ने सेवा, अनुशासन और सामाजिक चेतना का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा से साधना और साधना से सशक्त व्यक्तित्व निर्माण की जीवंत प्रयोगशाला बनकर उभरा है।
प्राचार्य डॉ. अलका मेश्राम एवं कार्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर जैनेंद्र दीवान ने कार्यक्रम के संचालन और व्यवस्था संबंधी मार्गदर्शन में बड़ी भूमिका निभाई।