भिलाई। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति एवं मेहनतकश आवास अधिकार संघ के प्रतिनिधि कलादास डेहरिया ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि आज औद्योगिक क्षेत्र के शहीद लक्ष्मण वर्मा चौक में दोपहर 12 बजे सैकड़ों मजदूर एकत्रित हुए। नारों के साथ शहीद लक्ष्मण वर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इसके पश्चात राजीव नगर औद्योगिक क्षेत्र में सैकड़ों मजदूरों ने विशाल जुलूस निकाला। जुलूस के दौरान
“मजदूर बस्तियों को स्थायी पट्टा दो”,
“चार श्रम कानून रद्द करो”,
“30,000 रुपये न्यूनतम वेतन दो”,
“गरीब बस्तियों को उजाड़ना बंद करो”,
“हॉस्पिटल सेक्टर के रहवासियों को प्रधानमंत्री आवास दो”
जैसे नारों से पूरा औद्योगिक क्षेत्र गूंज उठा।

लाल-हरा झंडा लिए मजदूरों का यह जुलूस लंबे समय बाद देखने को मिला। औद्योगिक मजदूरों ने “लाल जोहार” के साथ सलामी दी। हर चेहरे पर यह विश्वास झलक रहा था कि उनकी आवाज़, उनकी पीड़ा और उनकी समस्याएँ एक बार फिर बुलंद हो रही हैं। मजदूरों के बीच फिर से संघर्ष की उम्मीद जगी है।
अकलोर डीह, जरवाय, उमदा, छावनी, खम्हरिया सहित औद्योगिक क्षेत्र की दर्जनों बस्तियों से प्रमुख साथी इस जुलूस में शामिल हुए। जुलूस के पश्चात अनसुईया नगर में सभा आयोजित की गई।
सभा को प्रमुख वक्ता के रूप में रमाकांत बंजारे, रेणु, सीमा, मीना, संजना, मोहाल सिंह, मन्नू ठाकुर, ब्रम्हा, अभिषेक यादव, सुमित्रा, कंचन, शांति, निरा, मीरा, असरफ़ा, बेबी खारुन, भगत साहु, भुवन और संतोष महेश साहु ने संबोधित किया।
सभी वक्ताओं ने मजदूरों के मूलभूत अधिकारों की लड़ाई को और तेज़ करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि आज एक ओर शहरी मजदूरों की झोपड़ियाँ उजाड़ी जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर हसदेव, जशपुर, रायगढ़ और बस्तर के जंगल काटकर वहाँ के मूल निवासियों को बेघर किया जा रहा है। यह समय की माँग है कि सभी पीड़ित संघर्षों को एकजुट किया जाए।
सभा में यह स्पष्ट कहा गया कि हम सबको रोटी, कपड़ा, मकान और बोलने-लिखने की आज़ादी जैसे मौलिक अधिकार चाहिए।

सभा के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि फरवरी माह में जिला मुख्यालय और मुख्यमंत्री के समक्ष लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन कर मांगें रखी जाएँगी।
वर्तमान में चल रहे एस.आई.आर. के कारण मजदूरों में भय का माहौल है। जिनके पास आवास का पट्टा नहीं है, उन्हें मताधिकार से वंचित तो नही कर दीया जाएगा ? आशंका बनी रहती है। आज की परिस्थितियों में यह साफ दिखता है कि कंपनियाँ तो स्थायी हैं, मजदूरों की नौकरी स्थायी नही है, उनका आवास आज भी अस्थायी बना हुआ है।
आज के जुलूस और सभा में बच्चों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, क्योंकि आने वाली पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने अधिकारों की रक्षा की है।
भवदीय
कलादास डेहरिया
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा
मजदूर कार्यकर्ता समिति
मेहनतकश आवास अधिकार संघ




