धान खरीदी की धीमी गति के खिलाफ किसानों में जबरदस्त आक्रोश

किसानों को गुमराह करने और फूट डालने के लिए संघ और डबल इंजन की सरोकारों ने भारतीय किसान संघ को आंदोलन करने के लिए निर्देशित किया

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो गई है किसानों को टोकन के लिए भटकना पड़ रहा है केंद्र और राज्य सरकारों ने प्रतिदिन धान खरीदी की लिमिट को 800 क्विंटल निर्धारित किया है जिसके कारण धान खरीदी अत्यंत धीमी गति से हो रही है इससे किसानों में जबरदस्त आक्रोश है, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के आह्वान पर किसान एक पखवाड़े से धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने की मांग को लेकर धान खरीदी केंद्रों सहित चौक में धरना प्रदर्शन आंदोलन कर रहे हैं जिससे सरकारें भारी दबाव में है

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक एड राजकुमार गुप्त ने भारतीय किसान संघ को निशाने पर लेते हुए कहा है कि किसान पिछले 24 दिन से धान बेचने के लिए परेशान हैं और जद्दोजहद कर रहे हैं लेकिन भारतीय किसान संघ ने आज तक किसानों की सुध नहीं ली थी और जब छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के आंदोलन का असर दिखाई देने लगा है तब भारतीय किसान संघ को भी सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ा है, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक एड राजकुमार गुप्त ने आरोप लगाया है कि किसानों को गुमराह करने और किसानों में फूट डालने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के निर्देश पर भारतीय किसान संघ आंदोलन करने वाले हैं,

एड राजकुमार ने कहा है कि केंद्र और राज्य में आर एस एस के आनुषांगिक संगठन भाजपा की सरकार है भारतीय किसान संघ भी संघ का आनुषांगिक संगठन है ऐसे में किसानों के नाम पर आंदोलन करने का नाटक करने के बजाय सर संघ चालक मोहन भागवत से किसानों की परेशानियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाता तो सरकार निर्देश का पालन करने के लिए मजबूर हो गए होते और लंबे समय तक किसानों को परेशान नहीं होना पड़ता,

संघ के आनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ को निशाने पर लेते हुए एड राजकुमार गुप्त ने कहा है कि 2014 में किसानों की सहमति के बिना उनकी जमीन छीनने के लिए जब 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने वाले अध्यादेश लाया भारतीय किसान संघ ने विरोध नहीं किया और जब किसानों से चर्चा के बिना ही मोदी सरकार ने 3 कृषि कानून बनाया तब भी भारतीय किसान संघ ने विरोध नहीं किया किसानों के 13 महीने के राष्ट्रीय आंदोलन के बाद अंततः केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था

सरकार ने धान खरीदी की लिमिट को बढ़ाकर खरीदी की गति को तेज करने का निर्णय ले लिया है, श्रेय देने के लिए भारतीय किसान संघ को आंदोलन पर उतारा जा रहा है

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक एड राजकुमार गुप्त का मानना है कि किसानों के आंदोलन के दबाव में सरकार ने धान खरीदी की लिमिट को बढ़ाकर खरीदी की गति को तेज करने का निर्णय लिया है लेकिन इसका श्रेय भारतीय किसान संघ को देने के लिए आंदोलन करने की नौटंकी किया गया है।

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