Wednesday, March 4, 2026

विश्वसनीयता के पर्याय थे मार्क टली, दुनिया को कहा अलविदा..

नई दिल्ली/लंदन। (वरिष्ठ पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन के फेसबुक वाल से) बीबीसी की पहचान और प्रसारण की दुनिया के स्थापित नाम मार्क टली जिंदादिली के साथ भरी पूरी उम्र जी कर आज दुनिया से कूच कर गए। मौजूदा दौर में जब मीडिया की विश्वसनीयता कुछ ज्यादा ही दाव पर लगी है, ऐसे में मार्क सर जैसा विश्वसनीय नाम हमेशा याद रहेगा।

बीबीसी लंदन का वो दौर जब देश में आकाशवाणी और दूरदर्शन ही खबरों का सहारा थे ऐसे में हर रोज कोई न कोई ऐसा मौका आता था, जब लोग बीबीसी लंदन की तरफ रेडियो की सुई घुमा देते थे। फिर उसमें अगर मार्क टली बोल रहे हैं तो यकीन नहीं करने की कोई वजह नहीं होती थी।

मुझे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या वाले दिन की दोपहर की हल्की सी याद है, जब चर्चा चल रही थी कि बीबीसी लगाओ, उसमें ही सही बताएगा। संभवत: तब मार्क टली की आवाज में बीबीसी से ही इंदिरा गांधी के निधन की पुष्टि हुई थी और 89 में सैयद मोदी हत्याकांड के बाद की परिस्थिति में एक रोज खबर चली कि संजय सिंह (सांसद) की मौत हो गई है।
ऐसे में विश्वसनीयता के लिए तब मेरे आसपास लोग बात कर रहे थे कि बीबीसी से मार्क टली ने डिक्लियर कर दिया है। हालांकि ऐसा कुछ नहीं था। लोग सिर्फ मार्क टली और बीबीसी का नाम अपने दावे की विश्वसनीयता साबित करने ले रहे थे। इसके बाद 6 दिसंबर 1992 भी आया, जब सरकारी चैनल दूरदर्शन पर मीना कुमारी-धर्मेंद्र की फिल्म ‘पूर्णिमा’ का प्रसारण हो रहा था और दूसरी तरफ मार्क टली अयोध्या का आंखों देखा हाल सैटेलाइट टेलीविजन पर बता रहे थे।

हालांकि इस सीधे प्रसारण के लिए मार्क ने कई जोखिम भी उठाए थे। मार्क के मेरे जैसे हजारों-लाखों प्रशंसक हैं, सभी की अपनी-अपनी यादें हैं। साल 2016 में उनसे नई दिल्ली में अचानक मुलाकात हो गई थी। तब जो लिखा था, वह आज उन्हें खिराजे अकीदत के साथ…

मार्क सर के संग धुंधली तस्वीरें

पिछले हफ्ते दिल्ली जाने से पहले ऐसे ही कहीं इलेक्ट्रानिक मीडिया में एंकरों के ”चीखने-चिल्लाने” पर बहस हो रही थी। बात निकली तो एक जानकार ने कहा-जरा 31 अक्टूबर 1984 का बीबीसी का वीडियो यूट्यूब से डाउनलोड करके देखना। देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की खबर बीबीसी के संवाददाता मार्क टुली कितनी संजीदगी से दे रहे हैं। आज तो ब्रेकिंग के दौर में हर खबर पर ”चीखना-चिल्लाना” आम बात है।

उस रात मैनें यूट्यूब पर वह वीडियो देखा था। यह महज इत्तेफाक रहा कि नई दिल्ली में उस रात इंडिया हैबीटाट सेंटर में इंटरनेशनल जस्टिस मिशन (आईजेएम) का सेमीनार खत्म होने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हम जर्नलिस्ट होटल जाने कार का इंतजार करते खड़े थे कि अचानक दूसरी दिशा से मार्क टली अपनी पत्नी के साथ आते दिखाई दिए।
वहां हम जितने जर्नलिस्ट साथी थे, सभी के लिए मार्क टली एक ”मुंह मांगी मुराद” की तरह अचानक नमूदार हो गए थे। हम लोगों ने उन्हें घेर लिया। कई साथियों ने (मैनें भी) उन्हें बताया कि हम बचपन में आपकी आवाज रेडियो पर सुना करते थे। बेहद विनम्र मार्क टली सबसे बड़ी खुशमिजाजी से मिले, तस्वीरें खिंचाई और सबके स्टेट के बारे में हिंदी-अंग्रेजी में जानकारी ली।
फोटो खिंचाने का दौर कुछ लम्बा खिंचने लगा तो हंसते हुए मार्क बोले-आप लोगों ने तो मुझे फिल्म स्टार बना दिया। मारे खुशी के बहुत सी तस्वीरें धुंधली आईं लेकिन इसका किसी को गिला नहीं। इस बीच उनकी पत्नी कुछ दूर आगे बढऩे लगी थी,लिहाजा ”गृहमंत्रालय” का इशारा पा कर मार्क ने भी वहां से आगे बढऩे में अपनी खैरियत समझी। वाकई, आप हमारी बिरादरी के लिए फिल्म स्टार से कहीं ज्यादा हैं डियर मार्क सर।

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