जगदलपुर/बस्तर। दक्षिण बस्तर में नक्सल मोर्चे से एक बड़ी सफलता सामने आई है। दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (DKSZC) और साउथ बस्तर डिवीजन के कई सक्रिय व वरिष्ठ नक्सली कैडरों ने हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
सबसे बड़ा नाम मुछाकी एरा का है, जो DKSZC का सदस्य और साउथ बस्तर डिवीजन कमेटी का सचिव भी रहा है।
आज हैदराबाद में कुल 37 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें शामिल हैं—
- तेलंगाना स्टेट कमेटी के 12 कैडर
- दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी के 23 कैडर
- PLGA बटालियन नंबर 01 के 2 कैडर
यह कदम पूरे बस्तर क्षेत्र में नक्सल प्रभाव के कमजोर होने का साफ संकेत देता है।
“हिंसा छोड़कर लौटने वालों को पूरा संरक्षण”—सरकार व पुलिस का आश्वासन
राज्य सरकार और बस्तर पुलिस लंबे समय से यह संदेश दे रही है कि जो भी नक्सली हिंसा की राह छोड़कर लौटेंगे, उन्हें सुरक्षा और पुनर्वास की पूरी व्यवस्था दी जाएगी।
IG बस्तर रेंज सुंदरराज पट्टलिंगम ने बयान जारी करते हुए कहा—
“मुख्यधारा में लौटने वाले हर कैडर को सरकार, बस्तर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से पूर्ण सुरक्षा, सम्मानजनक जीवन और पुनर्वास की हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। हिंसा छोड़ना साहस और बेहतर भविष्य की इच्छा का प्रतीक है।”
क्या है इस सरेंडर की महत्ता?
दक्षिण बस्तर में सक्रिय एक बड़े नेटवर्क का कमजोर होना
शीर्ष कमांडरों के आत्मसमर्पण से निचले स्तर के कैडरों पर प्रभाव
हैदराबाद में 37 कैडरों का सामूहिक सरेंडर—नक्सल संगठन में हताशा का संकेत
सरकार की पुनर्वास नीति और विश्वास बहाली की जीत
क्षेत्र में शांति बहाली की ओर बड़ा कदम
इन कैडरों ने स्वीकार किया है कि वे विकास की राह और सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहते हैं।
इस बड़े सामूहिक निर्णय से—
बस्तर में वर्षों से जारी हिंसा प्रभावित इलाकों में स्थिरता बढ़ेगी
नक्सल संगठन में शामिल युवाओं को नई दिशा मिलेगी




