75 से अधिक विद्यार्थियों ने ‘मिट्टी परीक्षण’ का महत्व सीखा और संरक्षण का संदेश दिया
दुर्ग। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में मृदा दिवस के अवसर पर ‘मिट्टी परीक्षण कार्यशाला एवं विविध कार्यक्रमों’ का प्रभावी आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य आचार्य उमाशंकर मिश्रा ने की। प्रधानाध्यापक कमल सोनी तथा पूनम मिश्रा द्वारा अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य प्रभारी राजेश कुमार रहे तथा संचालन डॉ. अजय आर्य ने किया।

इस कार्यशाला में 75 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लेकर वैज्ञानिक मृदा परीक्षण की विधियों को सीखा। मृदा केंद्र की इंचार्ज एवं सहायक संचालक पुष्पा राजेंद्र ने कहा कि ‘उपजाऊ मिट्टी हमारी अगली पीढ़ी की सबसे बड़ी पूंजी है, इसका संरक्षण और परीक्षण कृषि-विकास की पहली शर्त है।’ तकनीकी सहायक संजीव जेना ने विद्यार्थियों को मृदा के भौतिक व रासायनिक गुणों की वैज्ञानिक जानकारी देते हुए कहा कि ‘मिट्टी केवल धूल नहीं, यह एक जीवित तंत्र है, जिसे समझना अत्यंत आवश्यक है।’ तकनीकी सहायक स्वाति सिंह राजपूत ने परीक्षण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए कहा कि ‘मृदा परीक्षण किसान को सही उर्वरक प्रबंधन की दिशा देता है, जिससे उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।’ एडीओ मंजूषा सिंह ने कहा कि ‘संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और मिट्टी की स्वास्थ्य कार्ड प्रणाली भविष्य की टिकाऊ कृषि का आधार है।’ डॉ. अजय आर्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘मिट्टी सिर्फ खेत की नहीं, हमारे चरित्र की भी नींव है। मिट्टी का सम्मान करना, धरती का ऋण चुकाने जैसा है।’ उन्होंने अपनी भावपूर्ण शायरी प्रस्तुत की –
‘मिट्टी की खुशबू में ही भविष्य की रेखाएँ मिलती हैं,
जो धरती को समझ ले, उसे हर मंज़िल मिलती हैं।’

प्राचार्य उमाशंकर मिश्रा ने मृदा संरक्षण को राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताते हुए विद्यार्थियों को व्यावहारिक सीख के लिए प्रेरित किया। प्रधानाध्यापक कमल सोनी और पूनम मिश्रा ने कार्यक्रम को एक सफल और सार्थक पहल बताते हुए सभी अतिथियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत परीक्षण परिणामों और ‘मिट्टी संरक्षण संकल्प’ के साथ किया गया। कार्यक्रम के प्रभारी राजेश कुमार ने सभी का धन्यवाद किया।




