छत्तीसगढ़। नागरिक अधिकार रक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक एड राजकुमार गुप्त ने 7 अक्टूबर को भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर निर्वाचन की प्रक्रिया को दखल रहित, स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव प्रेषित किया था किन्तु 15 दिन तक आयोग की ओर से कोई जवाब और प्रतिक्रिया नहीं मिलने से 22 अक्टूबर को आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पुनः स्मरण पत्र प्रेषित किया है, पत्र में उन्होंने कहा है कि दखल रहित, स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी निर्वाचन की प्रक्रिया का निर्धारण करना आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है ताकि चुनाव में भाग लेने वाले सभी अभ्यर्थियों को बिना किसी भेदभाव के चुने जाने के लिए समान अवसर प्राप्त हो, एड राजकुमार गुप्त ने आयोग पर आरोप लगाया है कि वर्तमान में आयोग द्वारा निर्धारित निर्वाचन की प्रक्रिया अभ्यर्थियों में भेदकारी है और इसमें स्वतंत्र अभ्यर्थियों की तुलना में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के अभ्यर्थियों के चुने जाने का अनुकूल अवसर मिलता है, पत्र में उन्होंने आयोग का ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा है कि संविधान में राजनीतिक दलों का कोई प्रावधान नहीं है।
लेकिन आयोग ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बैलेट पेपर/ ईवीएम के बैलेट यूनिट में राजनीतिक दलों के नाम और उन्हें आबंटित/आरक्षित चुनाव चिन्ह की घुसपैठ कराकर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के अभ्यर्थियों को चुने जाने का अनुकूल अवसर प्रदान किया है, संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा है विधि के समक्ष सभी समान है और बिना भेदभाव के सभी को समान अवसर का अधिकार प्राप्त है इसमें चुने जाने का अधिकार भी शामिल है, उन्होंने आयोग से मांग किया है कि बैलेट पेपर/यूनिट से राजनीतिक दलों के नाम और आरक्षित/आबंटित चुनाव चिन्ह सहित सभी चुनाव चिन्ह को तत्काल हटाया जाना चाहिए और सिर्फ अभ्यर्थियों के नाम और फोटो से ही निर्वाचन की प्रक्रिया पूर्ण किया जाना चाहिए,
आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि वर्तमान में बैलेट यूनिट/पेपर में राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के अभ्यर्थियों को प्रथम क्रम में सर्वोच्च स्थान प्रदान किया जाता है, दूसरे क्रम में राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के अभ्यर्थियों को, तीसरे क्रम में पंजीकृत अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के अभ्यर्थियों को और सबसे अंत में चौथे क्रम में स्वतंत्र अभ्यर्थियों के नाम को स्थान दिया जाता है इसके स्थान पर बैलेट यूनिट/पेपर में अभ्यर्थियों के स्थान का निर्धारण अल्फा बीटा के आधार पर किया जाना चाहिए, उन्होंने आयोग से यह भी मांग किया है कि निर्वाचन आवेदन पत्र में “किस राजनीतिक दल से” को तत्काल हटाया जाना चाहिए और राजनीतिक दलों द्वारा अभ्यर्थियों के लिए जारी किया जाने वाले प्रपत्र ए और बी को समाप्त किया जाना चाहिए,
संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए एड राजकुमार गुप्त ने आयोग का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि उपचुनाव और मध्यावधि चुनाव की असामान्य परिस्थितियों को छोड़कर लोकसभा और राज्यों के विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित है अर्थात् मतदाताओं को 5 वर्ष में एक बार लोकसभा के लिए प्रतिनिधि का और 5 वर्ष में एक बार उस राज्य के विधानसभा के लिए प्रतिनिधि निर्वाचित करने के लिए मतदान करने का अधिकार प्राप्त है जिस राज्य का वह सामान्य रूप से निवासी है जबकि आयोग की व्यवस्था में मतदाता को 5 साल में अलग-अलग राज्यों के विधानसभाओं के निर्वाचन प्रक्रिया में 10 भाग लेने का अवसर मिलता है, उन्होंने मांग किया है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मतदाता 5 साल में सिर्फ किसी एक राज्य के विधानसभा चुनाव में वोट कर सके इसके बाद 5 साल तक किसी भी राज्य के विधानसभा चुनाव में वोट नहीं कर सके,
नागरिक अधिकार रक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक एड राजकुमार गुप्त ने बताया है कि यदि निर्वाचन की प्रक्रिया में सुधार करने संबंधी उनके पत्र पर आयोग सकारात्मक परिवर्तन नहीं करता है तब सक्षम न्यायालय में याचिका दाखिल किया जायेगा।
एड राजकुमार गुप्त
