खबर आलोक संवाददाता संदीप सिंह की जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर से खास बातचीत
संदीप सिंह, पटना। पहले चरण के मतदान के बाद बिहार की सियासत में हलचल और बयानबाजी चरम पर है। जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर (पीके) ने कहा कि बिहार में अब जनता बदलाव के मूड में है और यह बदलाव केवल सरकार नहीं, सोच की दिशा भी बदल देगा।
“बीते 20 साल नहीं, बल्कि आज़ादी के बाद से अब तक का सबसे अधिक मतदान हुआ है। जनता ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है और सत्ता परिवर्तन का बिगुल बजा दिया है।”
“बदलाव की वोटिंग हुई है, नोट की नहीं”
पीके ने पहले चरण में हुई रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग को जनता के भीतर पनप रही नई राजनीतिक चेतना का परिणाम बताया।
“बिहार की जनता अब बिकाऊ नहीं, समझदार बन चुकी है। यह वोटिंग बदलाव की वोटिंग है, नोट की नहीं।”
उन्होंने सत्ताधारी एनडीए पर सीधा निशाना साधते हुए कहा —
“जो सरकार महिलाओं को ₹10,000 बाँटकर वोट खरीदने की कोशिश कर रही है, वह जनता को मूर्ख समझ रही है। अगर यह योजना सही मायने में महिला सशक्तिकरण के लिए होती, तो पाँच साल पहले लागू होती, न कि चुनाव से कुछ दिन पहले।”
पीके ने कहा कि आजीविका मिशन के तहत सहायता राशि का वितरण सरकार की चुनावी चाल थी।
“यह रोजगार नहीं, चुनावी रोजगार था — और जनता सब समझ चुकी है।”
“महागठबंधन भी सिर्फ सत्ता पाने की होड़ में, जनता के मुद्दे गायब”
प्रशांत किशोर ने महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) पर भी जमकर प्रहार किया।
“राजद और कांग्रेस की राजनीति भी अब मुद्दों से भटक चुकी है। तेजस्वी यादव खुद को बदलाव का चेहरा बताते हैं, लेकिन जनता देख रही है कि उनका बदलाव सिर्फ कुर्सी पाने की होड़ तक सीमित है।”
उन्होंने तंज कसा —
“महागठबंधन और एनडीए दोनों दो ध्रुव हैं, लेकिन जनता अब इन दोनों से ऊब चुकी है। बिहार की असली राजनीति अब तीसरा रास्ता तलाश रही है — और वही रास्ता जन सुराज दिखा रहा है।”
“प्रवासी मजदूर और महिलाएं बनीं असली शक्ति”
पीके ने कहा कि इस बार का मतदान पूरी तरह जनता बनाम सत्ता का था।
“छठ पूजा के बाद लाखों प्रवासी रुके और अपने मत का प्रयोग किया। महिलाएं पहले से कहीं अधिक संख्या में मतदान करने आईं। यह दोनों वर्ग इस चुनाव का निर्णायक चेहरा बनेंगे।”
“नीतीश-तेजस्वी दोनों के लिए जनता ने बदल दिया खेल”
पीके ने तीखे अंदाज़ में कहा —
“नीतीश कुमार को सत्ता बचाने की चिंता है, और तेजस्वी यादव को सत्ता पाने की। लेकिन जनता अब दोनों को विकल्प नहीं, एक जैसा सिस्टम मानती है।”
उन्होंने कहा —
“अगर नीतीश जी ने वास्तव में विकास किया होता तो आज उन्हें महिला समूहों को पैसों का सहारा नहीं लेना पड़ता। और अगर तेजस्वी यादव में विज़न होता तो वे सिर्फ नारे नहीं, नीति लेकर जनता के बीच जाते।”
“14 नवंबर को बिहार की राजनीति बदलेगी”
प्रशांत किशोर ने कहा कि इस बार परिणाम सबको चौंका देंगे —
“14 नवंबर को बिहार का राजनीतिक इतिहास बदलेगा। 2 करोड़ 10 लाख से अधिक मतदाताओं ने सिर्फ वोट नहीं डाला, बल्कि नई दिशा तय की है।”
रिपोर्टर: संदीप सिंह
खबर आलोक विशेष संवाद, पटना
पहले चरण मतदान पश्चात विशेष राजनीतिक रिपोर्ट




