बेमेतरा के सरकारी स्कूल में मानवता की मिसाल : प्रधान पाठक ने थामा तीन जरूरतमंद बच्चों का हाथ, उठाई शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी

बेमेतरा जिले के प्रधान पाठक धनेश रजक ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए तीन जरूरतमंद बच्चों की कक्षा 8वीं तक शिक्षा की जिम्मेदारी ली और उन्हें शैक्षणिक सामग्री प्रदान की।

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के साजा विकासखंड से मानवता और संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। शासकीय प्राथमिक शाला खपरी धोबी में पदस्थ प्रधान पाठक धनेश रजक ने आर्थिक और पारिवारिक संकट से जूझ रहे तीन बच्चों की शिक्षा का जिम्मा अपने कंधों पर उठाकर समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है।

सभी बच्चों को भेंट की गई आवश्यक शैक्षणिक सामग्री
प्रधान पाठक धनेश रजक ने विद्यालय में अध्ययनरत तीन बच्चों- महिमा निर्मलकर (कक्षा 7वीं), साक्षी निर्मलकर (कक्षा 5वीं) एवं धैर्य निर्मलकर (कक्षा 2री)—की शिक्षा की जिम्मेदारी कक्षा 8वीं तक स्वयं उठाने का संकल्प लिया है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दूसरे दिन वे बच्चों के घर पहुंचे और परिवार तथा ग्रामीणों की उपस्थिति में तीनों बच्चों को स्कूल बैग, सभी विषयों की कॉपियां, कंपास बॉक्स, पहाड़ा, कलर पेन, पेंसिल, पेन, रबर, कटर, रूमाल और पानी की बोतल सहित आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भेंट की।

मानवता की सच्ची सेवा है यह कार्य- सरपंच

प्रधान पाठक धनेश ने बच्चों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझते हुए यह पहल की। ग्राम पंचायत खपरी धोबी के सरपंच गिरधारी निर्मलकर ने कहा कि, यह कार्य केवल सहायता नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है। उन्होंने बताया कि धनेश रजक हमेशा विद्यार्थियों के हित में कार्य करते रहे हैं और इससे पहले भी कई जरूरतमंद बच्चों की मदद कर चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना, दिव्यांग बच्चों को प्रोत्साहित करना, विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाना तथा जरूरत के समय परिवारों की सहायता करना उनकी पहचान बन चुकी है।
कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा- रजक
किसी बच्चे के सिर से पिता का साया उठ जाना, परिवार में अभाव और संघर्ष का माहौल होना उसके भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में यदि समाज का कोई व्यक्ति आगे बढ़कर उसका हाथ थाम ले, तो उसकी जिंदगी की दिशा बदल सकती है। प्रधान पाठक धनेश रजक की यह पहल केवल तीन बच्चों की मदद नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि जरूरतमंद और अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि समाज की भी है। यदि सक्षम लोग ऐसे बच्चों की शिक्षा और आवश्यक जरूरतों में सहयोग करें, तो कोई भी बच्चा अभाव के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।

इस अवसर पर ये रहे उपस्थित
मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक तारकेश्वर निर्मलकर एवं सहायक शिक्षक थुकेल राम तारम ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि, धनेश रजक के व्यक्तित्व में सेवा, संवेदना और मानवता कूट-कूटकर भरी हुई है। उनका यह कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। इस अवसर पर बच्चों की माता, सरपंच गिरधारी निर्मलकर, प्रधान पाठक तारकेश्वर निर्मलकर, सहायक शिक्षक थुकेल राम तारम तथा विद्यार्थी लक्ष्य निर्मलकर, कौशल सिन्हा, योगेंद्र विश्वकर्मा एवं लालू निर्मलकर सहित ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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