धमधा नगर पंचायत का हाल इन दिनों बेहाल है स्थानीय नगरीय प्रशासन ने स्वच्छता को लेकर पूरे स्वच्छता पखवाड़ा और स्वच्छता सर्वेक्षण जैसी बड़ी बड़ी केंद्रीय योजनाओ का धज्जी उड़ा दिया है। कभी अपनी स्वच्छता, तालाबों की सुंदरता और हरियाली के लिए पहचाने जाने वाला धमधा नगर पंचायत आज कचरे, दुर्गंध और लापरवाही का प्रतीक बन गया है।
जहां कभी तालाबों की लहरें नगर की पहचान थीं, वहीं आज प्लास्टिक और सड़ी गंदगी तैर रही है। वही पूरे मामले में सोशल मीडिया में घमासान मच गया है कई लोग कह रहे है 6 माह पुराना तस्वीर है जबकि जो फोटो अखबारों में डाला गया है वह 30 अक्तूबर 2025 का है उसके बाद भी आज की यह तस्वीर 6 नवंबर 2025 की है जिसमें तस्वीर धमधा के चौखड़िया तालाब की है। और इसके साथ ही 6 तालाबों की गंदगी की तस्वीर कलेक्टर दुर्ग को प्रेषित की गई है अब देख जाए कि पुराना फोटो कह कर अपनी दायित्वों से बचने वाले अधिकारियों के ऊपर आखिर कब तक नकेल कसी जाएगी
कृष्ण कुंज गर्दन की तस्वीर जहां सफाई की दुर्दशा
नालियों में महीनों से नहीं सफाई, मच्छरों का आतंक
नगर पंचायत के सर्वाधिक वार्डों के नली में कचरा भरा पड़ा है, मच्छर और सड़ांध से लोग परेशान हैं। हर साल नाली सहित सफाई कार्यों पर लाखों रुपये खर्च दिखाए जाते हैं,लोगों से कचरा कलेक्शन के नाम पर शुल्क लिया जाता है टैक्स लिया जाता है लेकिन जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था नाम की चीज नहीं है। और मूलभूत असुविधाओं की कमी ने आम नगर वासियों का कमर तोड़ दिया है। शिकायतकर्ताओं को टारगेट किया जाता है जिससे लोग बोलने से कतरनें लगे है।
प्रसिद्ध तालाबों की नगरी में तैरते है प्लास्टिक और कचरे
यू तो धमधा अपने 6 आगर 6 कोरी तालाब के नाम से प्रसिद्ध है पूर्व में प्रशाशन द्वारा तालाबों के संरक्षण में कई दबे तालाबों का खनन और सफाई किया गया था ऐसा करके तालाबों को संरक्षित करने का कार्य किया गया था। और बकायदा सभी तालाबों को उनके नाम का बोर्ड लगाकर उनका नाम उजागर किया और धमधा की तालाबों की संस्कृति को प्रदर्शित किया गया था वही इन दिनों पूरे तालाब अब बदहाली की कहानी कह रहे हैं। कचरा, सीवेज और प्लास्टिक बोतलों ने तालाब की सुंदरता निगल ली है। नगर पंचायत की सफाई रिपोर्टें सिर्फ कागजों में चमकती हैं जमीन पर सड़ांध, फाइलों में साफ-सफाई नजर आ रही है
सीएमओ का गैरजिम्मेदार बयान — “गंदगी कहां नहीं है?”
नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी नेतराम रत्नेश को जब पत्रकार ने सवाल पूछा तो उन्होंने कहा
“गंदगी कहां नहीं है? पूरे छत्तीसगढ़ में है।”
यह बयान न केवल असंवेदनशील है बल्कि सिस्टम की सड़ांध को भी उजागर करता है।
पत्रकार को बयान देने से भी उन्होंने इनकार कर दिया — “जो करना है करो, मैं कोई बयान नहीं दूंगा।” कहकर पल्ला झाड़ लिया एक तरफ पूरा जिला प्रशासन दुर्ग कलेक्टर के3 सीधा निर्देश में कैसे शासकीय कार्य का निष्पादन तेजी से हो और कैसे आम नागरिकों को फायदा सुविधा पहुंचाया जा सके इसकी योजना में तेजी से कम किया जा रहा है और दूसरी ओर इस प्रकार ब्लॉक मुख्यालय से बाहर रह रहे और एसी कमरे में बैठकर अपना आराम दायक अंदाज में नगर की सफाई जैसी बड़े कार्यों से पल्ला झाड़ते नगर पंचायत के अधिकारी का बड़बोला बयान सरकार के सुशासन और दुर्ग कलेक्टर के सही प्रशाशन चलने की योजना को तार तार कर रहे है।
गार्डन बना शराबियों और मनचलों का ठिकाना,सफाई मुंह दिखाई तक नहीं
धमधा का एकमात्र सार्वजनिक गार्डन अब उपेक्षा का प्रतीक बन गया है। टूटी बेंचें,जंग लगे झूले,शराबियों और कपल्स का जमावड़ा,बच्चे खेलने से डरते हैं, परिवारों ने पार्क आना बंद कर दिया है। स्थानीयों का कहना — “नगर पंचायत ने पार्क को पार्क नहीं, शर्म का अड्डा बना दिया है।”
नगर में सभी गार्डन का हाल बेहाल है । कही अतिक्रमण है तो कही सफाई की बदल स्थिति तो कही मनचलों का और गंजेडियो का राज
एक नजर स्वच्छ नगर ,अव्यवस्था नगर तक का सफर
कुछ साल पहले धमधा नगर पंचायत को स्वच्छता अभियान में सम्मान मिला था। तब की प्रशासनिक पकड़ और आज की प्रशासनिक पकड़ पर काफी अंतर है। जगह जगह लोगो को जागरूक कर और कचरा कलेक्शन तमाम सफाई कार्यों पर पूरा प्रशाशन मुस्तैदी से कार्य कर रहा था
आज वही नगर कचरे में डूबा है — पोस्टरों पर विकास, ज़मीन पर सड़ांध। अगर अब भी नहीं जागे अधिकारी तो आने वाले दिनों में धमधा “तालाबों की नगरी” नहीं, बल्कि
“गंदगी की राजधानी” कहलाएगा। देखा जाए कि अब इस पूरे मामले की जिला प्रशासन दुर्ग कलेक्टर कितनी सफाई से इस मामले को साफ करेंगे।





