Thursday, March 5, 2026

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विष्णुदेव सरकार में किसान को हक पाने के लिए खुद को तहसील में करना पड़ा बंद, रिश्वतखोरी उजागर होने पर दबाव में जारी हुआ नामांतरण आदेश

राजनांदगांव। विष्णुदेव सरकार के “सुशासन” के दावों की पोल तुमडीबोड़ तहसील कार्यालय में उस वक्त खुल गई, जब एक किसान को अपने ही जमीन के नामांतरण के लिए तीन घंटे से अधिक समय तक खुद को कार्यालय के भीतर बंद करना पड़ा। यह घटना सरकार की प्रशासनिक संवेदनहीनता और राजस्व तंत्र में फैले भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बन गई है।
नामांतरण जैसे सामान्य राजस्व कार्य के लिए किसान से 1000 रुपये की रिश्वत वसूले जाने का आरोप सामने आया है। किसान द्वारा इसकी लिखित शिकायत भी की गई, लेकिन कार्रवाई तब तक नहीं हुई, जब तक कांग्रेस नेताओं और किसानों ने तहसील कार्यालय घेरकर प्रदर्शन नहीं किया।

प्रदर्शन के आगे झुका प्रशासन, तब जाकर मिला किसान को हक
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विपिन यादव, किसान कांग्रेस अध्यक्ष मदन साहू, प्रवक्ता राहुल तिवारी, महामंत्री चुंमन साहू, पूर्व एसएससी सदस्य क्रांति बंजारे, ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री गौतम वर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष टिकेश साहू, मंडल अध्यक्ष हेम सिंह साहू, सेक्टर प्रभारी भुवाल साहू सहित बड़ी संख्या में किसानों के उग्र प्रदर्शन के बाद ही तहसीलदार को नामांतरण का आदेश जारी करना पड़ा।

सवाल यह नहीं कि आदेश हुआ, सवाल यह है कि पहले क्यों नहीं हुआ?
यह सवाल अब पूरे जिले में गूंज रहा है कि—
क्या विष्णुदेव सरकार में किसान को न्याय तभी मिलेगा, जब वह खुद को कार्यालय में बंद करेगा?
क्या रिश्वतखोरी की शिकायतों पर कार्रवाई सिर्फ भीड़ और राजनीतिक दबाव के बाद ही होती है?
रिश्वतखोर बाबू पर कार्रवाई या सिर्फ आश्वासन?
तहसीलदार ने रिश्वत की शिकायत पर संबंधित बाबू पर कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन जिले के किसानों का कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी कई बार दिए गए, पर कार्रवाई कागजों से बाहर नहीं निकली।

कांग्रेस नेता पंकज बांधव का सरकार पर हमला
कांग्रेस नेता पंकज बांधव ने घटना की फोटो और जानकारी साझा करते हुए विष्णुदेव सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा—
“यह किसान नहीं, सरकार की नाकामी है जो तहसील के कमरे में बंद दिख रही है। अगर आज भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है।”
सुशासन के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न
तुमडीबोड़ की यह घटना यह बताने के लिए काफी है कि राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार अब भी जमीनी सच्चाई है, और सरकार के सुशासन के दावे सिर्फ मंचों तक सीमित हैं।

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