अलविदा नासिर भाई..

(वरिष्ठ पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन की कलम से)
मौजूदा दौर के सक्रिय हस्ताक्षरों में से एक वरिष्ठ साहित्यकार नासिर अहमद सिकंदर आज सुबह दुनिया-ए-फानी से कूच कर गए। भिलाई स्टील प्लांट से रिटायर नासिर भाई कलम के धनी थे। साहित्य जगत में खूब सक्रिय थे। हमेशा कुछ न कुछ मानीखेज रचते रहते थे। खास कर कविताएं।

भिलाई की आबोहवा में उन्होंने पूरी जिंदगी गुजारी और अपने इस शहर से उन्हें मुहब्बत भी थी। अपने बचपन और भिलाई को लेकर उन्होंने बहुत कुछ लिखा। बीते दशक में जांजगीर-चाम्पा से दो युवा शोधार्थी भिलाई पर काम करने आए थे। तब नासिर भाई ने दोनों को ‘इधर-उधर’ के बजाए सीधे मेरे पास भेज दिया था। दोनों शोधार्थी जैसी और जितनी जानकारी चाहते थे, सब मिल गई।

हालांकि मेरा नासिर भाई से कभी सीधा संवाद नहीं रहा। सिर्फ साहित्यिक आयोजनों में ही मिलना होता रहा। फेसबुक पर भी नासिर भाई बेहद सक्रिय थे। अपने परिवार से लेकर दुनिया जहान पर अपडेट रहते थे। अब यह सिलसिला थम गया। إِنَّا لِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

यहां फोटो साल 2003 में प्रख्यात कथाकार कमलेश्वर (ठीक बीच में) के भिलाई प्रवास का है। नासिर भाई के सामने अपने छत्तीसगढ़ से उठ कर देश में बड़ी पहचान कायम करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा हैं।

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