Friday, January 16, 2026

सेवा, सुधार और संस्कार से ही आर्यत्व का विस्तार – डॉ. अजय

अपना सुधार ही समाज की सबसे बड़ी सेवा है

भिलाई। आर्य समाज सेक्टर 6 भिलाई में सत्संग का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए डॉ. आर्य ने कहा कि “कृण्वन्तो विश्वमार्यम” का अर्थ है – हम विश्व को आर्य बनाएं, अर्थात् श्रेष्ठता, सत्य और सेवा के पथ पर आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती जी का संदेश था कि अपने व्यक्तित्व का परिष्कार किए बिना समाज का परिष्कार संभव नहीं।

डॉ. आर्य ने कहा “जो स्वयं को सुधार लेता है, वही समाज को संवार लेता है। जो सेवा में भाव रखता है, वही जीवन का अर्थ समझता है।’
उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद ने लिखा है -‘ मनुष्य को सामाजिक सर्वहितकारी नियमों में परतंत्र रहना चाहिए और प्रत्येक हितकारी कर्मों में स्वतंत्र। आज आवश्यकता है कि हम जनहित और लोकहित के कार्यों को प्राथमिकता दें। उन्होंने व्यंग्यात्मक उदाहरण देते हुए कहा कि हम अपने घर को तो साफ रखते हैं, पर सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं – यह प्रवृत्ति बदलनी होगी।

डॉ. आर्य ने यह भी कहा कि’ आप जीवन को केवल तर्क से नहीं, बल्कि सेवा, सत्कार और ध्यान से बदल सकते हैं।’ उन्होंने हँसी के माध्यम से समझाया कि एक जंगल में एक बार आंधी आई एक मच्छर एक बड़े पेड़ का सहारा लेकर के स्वयं को बचाने की कोशिश करता है। कुछ देर बाद आंधी शांत हो जाती है। मच्छर उस पेड़ से जब उतर रहा होता है उसके दोस्त आते हैं। इस मच्छर की स्थिति ऐसी है कि वह हाफ रहा, हैं पसीना निकल रहा होता है। जैसी वह के दोस्तों को देखता है तो कहने लगता है कि आज मैं नहीं होता तो यह पेड़ गिर गया होता। हमें यह बात सुनकर हंसी आती है लेकिन सच्चाई है। हम अपने स्वार्थ को परमार्थ का नाम दे रहे होते है।दिखावा नहीं, सुधार ही सच्ची साधना है। अपना सुधार ही समाज की सबसे बड़ी सेवा है।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में वैदिक यज्ञ का आयोजन हुआ। आचार्य अंकित आर्य ने वेद मंत्रों का पाठ किया, जिससे वातावरण वैदिक स्वर और शांति से भर गया। कार्यक्रम में रवि आर्य ने अपील की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आर्य समाज के 150 वर्ष पूर्ण होने पर जारी किए गए ₹200 एवं ₹150 मूल्य के स्मृति सिक्के, जो भारत सरकार की अधिकृत वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, श्रद्धालुओं को स्मृति के रूप में प्राप्त करने चाहिए ।यह आर्य परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक होगा।

आर्य समाज के प्रधान अवनी भूषण पुरंग ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि ऐसे आयोजन समाज में वैदिक आदर्शों और मानवीय एकता को सशक्त बनाते हैं। डॉ. अजय आर्य ने संदेश दिया कि वैदिक शिक्षा का सर्वोच्च लक्ष्य व्यक्तित्व का परिष्कार और समाज के प्रति संवेदना का विकास होना चाहिए- क्योंकि शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कार का नाम है। इसलिए शिवा का अवसर ढूंढो।

अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन के सफल संपन्न होने पर आर्य समाज सेक्टर 6 भिलाई के पदाधिकारियों ने आयोजकों को हार्दिक बधाई दी।

कार्यक्रम में प्रकाश कुमार डॉनोडे, जवाहर लाल, यतीन्द्र पुरंग, धीरज शास्त्री, उत्तम आरदा, के.आर. राजी, सीमा कठाले, रश्मि डहारे, शकुन्तला द्विवेदी, अंजू गुप्ता, ज्योति पुरंग, विजया, डॉ. जवाहर लाल सरपाल, विष्णुप्रिया रथ, प्रमिला सरपाल एवं डॉ. अजय आर्य सहित अनेक आर्य बंधु-भगिनियाँ उपस्थित रहीं।

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