इंजन आधारित शोध एवं इलेक्ट्रिक वाहन नवाचार की दिशा में धमतरी पॉलिटेक्निक का बड़ा कदम

धमतरी पॉलिटेक्निक को प्रो. डॉ. मोनिका आर्य एवं डॉ. अजय आर्य का प्रेरणादायक योगदान

धमतरी: भोपालराव पवार शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, धमतरी में तकनीकी नवाचार और रोजगारोन्मुख शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। कॉलेज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग को डॉ मोनिका आर्य एवं डॉ अजय आर्य ने व्यावहारिक शिक्षण को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाने के उद्देश्य से अपनी नैनो कार को अनुसंधानात्मक प्रयोग के लिए संस्था के छात्रों के लिए उपलब्ध कराने की मंशा जाहिर की है।

इस पहल के तहत वाहन के पेट्रोल फोर स्ट्रोक इंजन को अलग निकालकर लेबोरेटरी प्रैक्टिकल अध्ययन हेतु प्रयोग किया जाएगा। वहीं, उसकी बॉडी और चेसिस का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन रूपांतरण के प्रायोगिक अध्ययन में किया जाएगा। यह पहल विद्यार्थियों को पारंपरिक इंजन तकनीक और उभरती इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक दोनों के तुलनात्मक और व्यावहारिक अनुभव का अवसर प्रदान करेगी।

कॉलेज के प्राचार्य अमित मिश्रा ने बताया कि-
“आने वाला युग इलेक्ट्रिक वाहनों का होगा। हर व्यक्ति नई इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में सक्षम नहीं होता। यदि हम वर्तमान पेट्रोल या डीजल वाहनों को ही इलेक्ट्रिक स्वरूप में रूपांतरित करने की दिशा में शोध करें, तो यह पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक दृष्टि—दोनों से ही लाभकारी सिद्ध होगा।”

उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘रोजगारोन्मुख शिक्षा’ के सपनों को साकार करने की दिशा में ठोस कदम है। इस परियोजना में प्रोफेसर डॉ. मोनिका आर्य और डॉ. अजय आर्य की यह अपनी नैनो वाहन उपलब्ध करने की मंशा उल्लेखनीय है। दोनों ने शैक्षणिक अनुसंधान हेतु अपनी नैनो कार संस्थान को उपलब्ध करने की मंशा जाहिर की, जिससे विद्यार्थियों को इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।अखिलेश गायधने व्याख्याता स्वामी आत्मानंद तहसीलपारा कोंडागांव ने उनकी इस मंशा को साकार रूप देने, संस्था के प्रिंसिपल से अनुमति लेने एवं कागजी कार्यवाही में उनको धरातलीय सहयोग किया।

डॉ. अजय आर्य एक संस्कृत शिक्षक होने के साथ-साथ समाज सेवा, शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में सक्रिय और प्रेरक व्यक्तित्व हैं। वहीं प्रो. डॉ. मोनिका आर्य कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में कार्यरत हैं और तकनीकी नवाचार, शोध तथा डिजिटल साक्षरता को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। दोनों का यह योगदान शिक्षा जगत के लिए एक मिसाल बन गया है।
प्राचार्य अमित मिश्रा ने कहा-
“डॉ. मोनिका और डॉ. अजय आर्य का यह योगदान ऐसा है जैसे किसी चिकित्सा महाविद्यालय को शरीर दान देकर चिकित्सा विद्यार्थियों को प्रायोगिक समर्थ बनाया जाता है वैसे ही इस तरह के योगदान से तकनीकी विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला के समान है। इससे छात्र न केवल तकनीकी दक्षता प्राप्त करेंगे, बल्कि शोध और नवाचार की दिशा में भी अग्रसर होकर एक रोजगारोन्मुख शिक्षा प्राप्त करेंगे।”

इस परियोजना से मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों को इलेक्ट्रिक वाहन रूपांतरण तकनीक का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही यह पहल प्रदेश के अन्य तकनीकी संस्थानों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभरेगी।

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