विकास की कमान अनुभवी हाथों मेंः मिश्रा बने नीति आयोग उपाध्यक्ष, मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा

सिंचाई, शहरी सुधार और प्रशासनिक सख्ती की पहचान रहे वरिष्ठ आईएएस विकास संकेतकों पर सीधे सीएम को करेंगे रिपोर्ट

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी गणेश शंकर मिश्रा को राज्य नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया जाना प्रशासनिक हलकों में एक निर्णायक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। नीति आयोग को राज्य के विकास एजेंडे के केंद्र में लाना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में मिश्रा राज्य के प्रमुख विकास संकेतकों पर सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करेंगे। यह व्यवस्था नीति निर्माण और क्रियान्वयन के बीच अंतर कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसे राज्य सरकार के ‘अंजोर छत्तीसगढ़’ विज़न और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 लक्ष्य से भी जोड़ा जा रहा है।

‘बुल्डोज़र प्रशासक’ जिनकी कार्यशैली ने विद्याचरण शुक्ल को प्रभावित किया

मिश्रा का प्रशासनिक करियर अनेक निर्णायक हस्तक्षेपों के लिए जाना जाता है। रायपुर नगर निगम में 1995 में महापौर प्रणाली लागू होने से पहले वे अंतिम प्रशासक रहे, जहाँ अवैध अतिक्रमण हटाने, नगरीय सुधार और प्रशासनिक अनुशासन स्थापित करने की कठोर कार्रवाइयों ने उन्हें “बुलडोज़र प्रशासक” की पहचान दिलाई। मात्र पाँच माह के अल्प कार्यकाल में पाँच हजार से अधिक अतिक्रमण हटाए गए-एक ऐसा अभियान जिसे रायपुर के शहरी प्रबंधन और निगम प्रशासन के इतिहास में स्वर्णिम दौर के रूप में याद किया जाता है।

उनका यह निर्णायक और परिणामोन्मुख नेतृत्व तत्कालीन केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री तथा छत्तीसगढ़ की राजनीति के प्रभावशाली नेता वि‌द्याचरण शुक्ल को इतना प्रभावित कर गया कि उन्होंने मिश्रा को अपनी टीम में शामिल कर दिल्ली बुला लिया।

जिलों में कलेक्टर रहते हुए बदली प्रशासन की धार

राजनांदगांव में कलेक्टर रहते हुए मिश्रा ने बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाकर पाँच सौ से अधिक बाल विवाह रुकवाए और पंचायत स्तर पर स्वच्छता एवं जनभागीदारी का मॉडल विकसित किया। सन 2005 में, एक ओर जहां अविभाजित मध्यप्रदेश क्षेत्र के किसी जिले का खाता भी नहीं खुला था, छत्तीसगढ़ का राजनंदगांव अकेला ऐसा जिला था जिसके 12 ग्राम पंचायतों को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम द्वारा स्वच्छता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।
नक्सल प्रभावित बस्तर में उन्होंने कलेक्टोरेट को ‘गांधी सेवा सदन’ के रूप में विकसित कर प्रशासन को जनता के लिए अधिक सुलभ और संवेदनशील बनाने का प्रयास किया। इस पहल को प्रशासनिक मानवीकरण की दिशा में उल्लेखनीय कदम माना गया।

राज्य स्तर पर योजनाओं से बना विकास का रिकॉर्ड, मोदी ने भी सराहा

जल संसाधन विभाग में रहते हुए उन्होंने ‘अभियान लक्ष्य भागीरथी’ के माध्यम से एक वर्ष से काम समय में अभूतपूर्व सिंचाई क्षमता सृजित की, जिससे राज्य के कृषि ढांचे को नई मजबूती मिली। इस पहल की राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में सचिव के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने अल्प अवधि में ही लाखों घरों तक नल-जल कनेक्शन पहुँचाने का व्यापक अभियान संचालित किया। इसके परिणामस्वरूप पेयजल उपलब्धता में ऐसी उल्लेखनीय वृ‌द्धि हुई, जो पिछले 70 वर्षों में हुए कुल विस्तार से भी अधिक दर्ज की गई।

बतौर आबकारी विभाग के प्रमुख, मिश्रा ने शराबबंदी के विषय पर सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक पहल-दोनों को समान रूप से आगे बढ़ाया, जिसे उनके जनोन्मुख दृष्टिकोण का सशक्त उदाहरण माना जाता है। उनके कार्यकाल में पहली और अब तक अंतिम बार ऐसा हुआ कि 350 से अधिक शराब दुकानों को बंद किया गया, और तत्कालीन सरकार ने आंशिक मद्यनिषेध की दिशा में ठोस व गंभीर कदम उठाए।

नीति आयोग में अनुभव का सीधा उपयोग

प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि जिलों से लेकर सचिवालय तक विविध जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन कर चुके अधिकारी के रूप में मिश्रा ने राज्य की चुनौतियों और संभावनाओं को केवल समझा ही नहीं, बल्कि उन पर ठोस परिणाम देने की क्षमता भी सिद्ध की है। यही कारण है कि नीति आयोग में उनकी भूमिका मात्र सलाह तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि विकास की दिशा निर्धारित करने वाली एक सक्रिय और निर्णायक भूमिका के रूप में देखी जा रही है।

गणेश शंकर मिश्रा की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ की विकास रणनीति को प्रशासनिक अनुभव और संस्थागत ताकत देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है जो राज्य को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में मजबूत योगदानकर्ता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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