छत्तीसगढ़ के बजाये जम्मू के प्रो.विनय चौहान को क्यों कुलपति बनाने का प्रयास हो रहा,क्या भाजपा का यही एजेंडा है?
रायपुर/ शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ में छत्तीसगढ़ के प्राध्यापक को कुलपति बनाने कि मांग करते हुये प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ में छत्तीसगढ़ के प्राध्यापको में से किसी को भी कुलपति नियुक्त किया जाये। छत्तीसगढ़ के प्राध्यापको को नजरअंदाज कर जम्मू के प्रोफेसर विनय चौहान को कुलपति बनाने कि चर्चा जोरो पर है। आखिर भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ के प्राध्यापको को क्या योग्य नहीं मानती। ये छत्तीसगढ़ के अधिकार पर डांका है। भाजपा अपने पितृ संगठन आरएसएस को खुश करने छत्तीसगढ़ के प्राध्यापको का अधिकार छीन रही है। प्रदेश के 15 विश्वविद्यालय में 9 में अन्य राज्यों से कुलपति है, पंड़ित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में कुलपति- प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ल उत्तरप्रदेश से, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में वर्तमान में आयुक्त के प्रभार पर निवर्तमान कुलपति- बलदेव भाई शर्मा उत्तरप्रदेश, मथुरा,पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय कुलपति -डॉ. पी के पात्रा ओड़िसा से, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग कुलपति- प्रो. संजय तिवारी मध्यप्रदेश, जबलपुर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ कुलपति-प्रो. लवली शर्मा उत्तर प्रदेश से, शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर कुलपति-प्रो.मनोज कुमार श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश, आगरा, दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग कुलपति- डॉ. राम रण विजय सिंह हरियाणा, करनाल से अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर में कुलपति-प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी मध्यप्रदेश से, पंड़ित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, बिलासपुर कुलपति- प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत उत्तरप्रदेश, आगरा से है ऐसे में रायगढ़ विश्वविद्यालय में जम्मू से कुलपति बनाने कि योजना छत्तीसगढ़ के साथ अन्याय है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि शहिद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय 5 वर्ष पूर्व कांग्रेस की भूपेश बघेल की सरकार के समय अस्तित्व में आया था और किसी भी नए विवि में प्रथम कुलपति नियुक्त करने का अधिकार राज्य शासन का होता है और जब यह अवसर हमें मिला तो हमने गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के प्राध्यापक डॉ. ललित प्रकाश पटेरिया को स्थानीय प्राध्यापक होने की वजह से प्रथम कुलपति के रूप में नियुक्त किया। इस बीच 24 नवंबर 2025 को कुलपति के 5 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है और नए कुलपति की चयन प्रक्रिया भी 9 नवंबर को पूर्ण हो चुकी है, हालांकि नए कुलपति की नियुक्ति का आदेश अभी तक इसलिए नहीं हुआ है। क्योंकि जम्मू विवि के जिस प्राध्यापक विनय चौहान को यहां कुलपति बनाया जाना तय हुआ है, उसे उसकी इच्छा के अनुरूप इस बात के लिए समय दिया जा रहा है कि वह रायगढ़ व वहां के विवि के वातावरण को भलीभांति देख समझ ले।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि विनय चौहान इस बीच दो बार रायगढ़ आ कर छत्तीसगढ़ लोगों से मिल कर उन्हें कई तरह के प्रलोभन के साथ वहां के वातावरण को अपने अनुरूप करने एक्सरसाइज कर ली है। यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि यह सरकार खुलेआम आयातित लोगों को शिक्षा के सर्वोच्च पद पर काबिज करने में इस कदर तुली है कि आधिकारिक आदेश के पहले ही उसके नाम की चर्चा गली मोहल्ले से लेकर राजधानी तक हो रही है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने दावा किया कि आगामी कुछ दिनों में रायगढ़ विवि के कुलपति की नियुक्ति कर दी जाएगी और वह नाम जम्मू के प्रोफेसर विनय चौहान का होगा। खोजबीन समिति ने 9 नवंबर को लोक भवन में कई दावेदारों को दो पालियों में प्रजेंटेशन के लिए नाम मात्र के लिए बुलाया था। जिसमें 11 उम्मीदवारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की थी। इन 11 में से सर्च कमेटी ने 4 या 5 का पैनल बना कर कुलाधिपति को सौंप दिया है। इसमें एक नाम जम्मू विश्वविद्यालय के प्रो. विनय चौहान का है,जो आजकल खूब चर्चा में है। प्रोफेसर चौहान मैनेजमेंट विभाग के हैं और छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में उन्हें कुलपति बनाने भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी खुलासा किया कि प्रो. चौहान को पहले संत गहिरा विवि अम्बिकापुर में कुलपति नियुक्त करने की तैयारी थी। इस विवि में भी कुल 3 नाम के पैनल में प्रो. चौहान का नाम था। चूँकि अम्बिकापुर मुख्यमंत्री का क्षेत्र है और जम्मू के व्यक्ति को कुलपति बनाया जाता तो बाहरी व्यक्ति का मुद्दा जीवित हो जाता। इसलिए इनके नाम पर मुहर नहीं लग सकी। इसलिए उन्हें शहिद नंदकुमार पटेल विवि रायगढ़ के लिए फाइनल कर दिया गया है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता ठाकुर ने कहा, कुलपति के लिए छत्तीसगढ़ व्यक्ति का चयन इसलिए भी आवश्यक है। क्योंकि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक नेतृत्व जो करता है। वह न केवल नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता, अनुसंधान संस्कृति तथा संस्थागत विकास की दिशा भी तय करता है। यदि कुलपति स्वयं विषयवस्तु एवं छत्तीसगढ़ आवश्यकताओं से भली-भांति परिचित न हो, तो विश्वविद्यालय की प्रगति प्रभावित होना स्वाभाविक है। अभी विधानसभा में भाजपा के पूर्व मंत्री व वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने भी इसी उद्देश्य को लेकर अपने विचार रेखांकित की है। जिसकी चर्चा सभी तरफ तो हुई। पर यह सब दिखावा मात्र था। छत्तीसगढ़ के लोगों को कब स्किल किया जाएगा और जो स्किल हैं उनका उपयोग कब करेंगे। मेड इन इंडिया व मेड इन छत्तीसगढ़ के संदर्भ में उनका अभिप्राय मात्र दिखावे के लिए था। कांग्रेस प्रवक्ता ठाकुर ने सवाल किया कि आखिर हम कब तक दूसरे राज्यों की प्रतिभा के भरोसे रहेंगे। जब छत्तीसगढ़ में प्रतिभा की कमी नहीं है तो क्यों इन्हें मौका नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि अजय चंद्राकर ने कहा था, छत्तीसगढ़ में दुर्गा पण्डाल कब तक बंगाल के लोग सजाते रहेंगे। मेड इन छत्तीसगढ़ कब यथार्थ रूप लेगा। बगैर इसके 2047 की परिकल्पना व्यर्थ है और यह सच है कि भाजपा के रहते छत्तीसगढ़ को उनका हक कभी नहीं मिल सकता।




