Thursday, March 5, 2026

साइबर सेल अधिकारियों द्वारा साइबर सुरक्षा पर परामर्श सत्र आयोजित

भिलाई। हेरिटेज इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल , दुर्ग में साइबर अपराध को रोकने एवं छात्रों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में साइबर पुलिस ने विद्यालय का दौरा किया और बच्चों को साइबर सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक (इंफ्रास्ट्रक्चर) बृजमोहन उपाध्याय के स्वागत उद्बोधन से हुई, उन्होंने समझाया कि तेजी से बढ़ते ऑनलाइन उपयोग के कारण साइबर अपराधों में वृद्धि हो रही है, इसलिए छात्रों का सतर्क और जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. संकल्प राय ( इंस्पेक्टर साइबर एक्सपर्ट ) ने बच्चों को विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों जैसे– ऑनलाइन धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग, फर्जी अकाउंट, सोशल मीडिया का दुरुपयोग तथा अनैतिक ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने ऐसे अपराधों के कानूनी परिणामों के बारे में भी जागरूक किया। अधिकारी ने विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों जैसे—ऑनलाइन ठगी, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग, फर्जी प्रोफ़ाइल, पासवर्ड हैकिंग, सोशल मीडिया के दुरुपयोग के बारे में सरल और स्पष्ट उदाहरणों के साथ जानकारी दी।

इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को साइबर सुरक्षा से जुड़े कुछ आवश्यक नियमों का पालन करने की सलाह दी, जैसे— किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी, पासवर्ड या OTP किसी से भी साझा न करना। अनजान लिंक, मैसेज या कॉल पर क्लिक न करना। सोशल मीडिया पर मर्यादा और सावधानी के साथ व्यवहार करना। किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत माता-पिता, शिक्षक या साइबर पुलिस को बताना।मजबूत पासवर्ड बनाने और दो-स्तरीय सत्यापन का उपयोग करने की आदत विकसित करना।

भौतिक और साइबर अपराध दोनों में साक्ष्य की आवश्यकता होती है। अंतर केवल इतना है कि भौतिक अपराध में साक्ष्य दृश्य और प्रत्यक्ष होते हैं, जबकि साइबर अपराध में साक्ष्य डिजिटल माध्यम से प्राप्त किए जाते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ तकनीकी उपकरणों और सॉफ्टवेयर की सहायता से अपराधी की पहचान करने और उसके विरुद्ध प्रमाण एकत्र करने में सक्षम होते हैं।साइबर सुरक्षा के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही की जा सकती है।

विद्यार्थियों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा तथा साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कराने के तरीकों के बारे में मार्गदर्शन दिया गया। इस अवसर पर एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। सत्र के दौरान छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया व अधिकारी से साइबर सुरक्षा से संबंधित कई प्रश्न पूछे। साइबर पुलिस ने हर प्रश्न का विस्तार से उत्तर दिया तथा वास्तविक मामलों के उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार सतर्कता अपनाकर साइबर अपराधों से स्वयं को सुरक्षित रखा जा सकता है।
अधिकारियों ने साइबर अपराधों के कानूनी परिणामों पर भी प्रकाश डाला और तकनीक के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग पर विशेष बल दिया। वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया गया कि ऑनलाइन की गई छोटी-सी गलती भी गंभीर परिणाम ला सकती है।

संयुक्त सचिव उमाकांत मिश्रा ने कहा – कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने हेतु आवश्यक ज्ञान और आत्मविश्वास प्रदान करना था, जो पूर्णतः सफल रहा। बच्चों ने न केवल नई जानकारी प्राप्त की बल्कि स्वयं जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने का संकल्प भी लिया।

विद्यालय प्रबंधन समिति के बृजमोहन उपाध्याय, संयुक्त सचिव उमाकांत मिश्रा, डायरेक्टर ऐकडेमिक एवं प्राचार्या दीप्ति तिवारी ने साइबर सेल अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों में जागरूकता फैलाने हेतु उनका आभार व्यक्त किया। सत्र का समापन विद्यार्थियों को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत सूचना देने के संदेश के साथ हुआ।ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अंत में ऐकडेमिक कोऑर्डिनेटर श्रीमती हरबिंदर कौर संधु , वेदप्रकाश बाजपेई ने साइबर पुलिस का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के समग्र विकास और डिजिटल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और सभी छात्रों ने इससे बहुत लाभ प्राप्त किया।

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