दुर्ग छत्तीसगढ़ के प्रतिभागी छत्तीसगढ़ी संस्कृति को कर रहे हैं उजागर
लखनऊ में आयोजित 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी में रायपुर संभाग छत्तीसगढ़ की स्काउट-गाइड टीम गर्व और उत्साह के साथ प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही है। स्काउट टीम में सुजल वर्मा-ऋषभ वर्मा-ऋषभ चतुर्वेदी-शिवम राय-मोनिश लैशर-संभव प्रताप उपाध्याय-आदर्श कुमार और कृष्णकांत शामिल हैं। गाइड्स टीम में साक्षी साहू-अनुष्का शर्मा-गरिमा वर्मा-रिया ठाकुर-आरुषि साह-ज्योति बांधे-मानवी सोनी और अनुग्रह बंजारे भाग ले रही हैं। इस दल को दिशा देने वाले पदाधिकारियों में श. एस.के. अग्रवाल प्राचार्य-विजय कुमार सहायक आयुक्त, सोना सेठ उप-आयुक्त, गोरा भुवन बाबू राज्य संगठन आयुक्त- सियाराम यादव राज्य प्रशिक्षण आयुक्त, एस.एस.एच. जैदी एलटी स्काउट, मनोज कुमार मालिक एलटी,एस.ए. अलीम एलटी स्काउट, सी.पी. राजावत एएलटी, श्रवण लाल जाट एएलटी शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ की टीम कड़ाके की सर्द रातों में टेंट में रहकर कठोर अनुशासन का प्रशिक्षण ले रही है। आठ स्काउट्स का नेतृत्व डॉ. अजय आर्य तथा आठ गाइड्स का नेतृत्व डॉ. मोना अली कर रही हैं। कैंपफायर के दौरान छात्र-छात्राएँ छत्तीसगढ़ी वेशभूषा और लोक-संस्कृति का अद्भुत प्रदर्शन कर रहे हैं। ‘राउत नाचा’-‘नाचे गेड़ी’ जैसी अभ्यासध्वनियाँ पूरे परिसर को जीवंत कर रही हैं। टेंट निर्माण-सफाई-कैंपक्राफ्ट और सामूहिक जीवन-पद्धति का अभ्यास आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का वास्तविक प्रशिक्षण दे रहा है। इस भावनात्मक अनुभव को व्यक्त करते हुए डॉ. अजय आर्य ने कहा – ‘हमारे बच्चे घर पर एक गिलास पानी भी स्वयं लेकर नहीं पीते और यहाँ वही बच्चे अपनी थालियाँ स्वयं धो रहे हैं-रहने की जगहें स्वयं साफ कर रहे हैं-समय प्रबंधन सीख रहे हैं-यही जंबूरी का वास्तविक जीवन पाठ है।

डॉ. अजय आर्य ने पूर्व राज्य प्रशिक्षण आयुक्त डॉ. विनोद कुमार तिवारी से हुई सौहार्दपूर्ण भेंट को विशेष रूप से स्मरणीय बताया और कैंप प्रबंधन के अनुभवों से प्राप्त महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शन का उल्लेख किया। उन्होंने पीबीएस उषा-उपयुक्त पदाधिकारियों रवींद्र कुमार-अशोक चंद्राकर तथा उमाशंकर मिश्रा के सहयोग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जिन्होंने इस अवसर को संभव बनाया। छात्रों का अनुभव ही जंबूरी की वास्तविक उपलब्धि है। स्वयं की क्षमता को पहचानना-साझा जीवन में रहकर राष्ट्रीय एकता की अनुभूति करना-और अपनी सांस्कृतिक पहचान को गर्वपूर्वक प्रस्तुत करना उन्हें भविष्य का योग्य नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में प्रेरित कर रहा है। आज छत्तीसगढ़ की यह टीम केवल प्रतिनिधित्व नहीं कर रही बल्कि यह संदेश दे रही है कि युवा शक्ति ही नए आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान है।





