Saturday, January 17, 2026

चार नए श्रम क़ानूनों के विरोध में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का दुर्ग में प्रदर्शन, प्रधानमंत्री एवं अन्य को संबोधित ज्ञापन सौंपा

दुर्ग। दुर्ग ज़िला मुख्यालय में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मज़दूर कार्यकर्ता समिति) के बैनर तले मज़दूरों और आम नागरिकों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम क़ानूनों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। शांतिपूर्ण रैली के बाद प्रधानमंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री तथा भारत के राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन दुर्ग के श्रम आयुक्त के माध्यम से सौंपा गया।

कार्यक्रम की शुरुआत दुर्ग मुख्यालय स्थित श्रम आयुक्त कार्यालय के बाहर सैकड़ों श्रमिक, महिला मज़दूर, ठेका मज़दूर, संगठित व असंगठित क्षेत्र के कर्मी, छात्र-युवा एवं विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए और केंद्र सरकार के श्रमिक-विरोधी एवं कॉर्पोरेट-पक्षधर निर्णयों के खिलाफ नारे लगाए गए और चारों श्रम क़ानूनों को वापस लेने तथा छत्तीसगढ़ में इन्हें लागू न करने की माँग प्रमुख रूप से उठाई गई।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मज़दूर कार्यकर्ता समिति) के पदाधिकारियों ने कहा कि चारों श्रम संहिताएँ (क़ानून) मिलकर पिछले दशकों में मज़दूर वर्ग द्वारा संघर्षों के माध्यम से हासिल बुनियादी अधिकारों – जैसे स्थायी रोज़गार, उचित मज़दूरी, ओवरटाइम का भुगतान, सुरक्षा मानक, ट्रेड यूनियन मान्यता और सामूहिक सौदेबाज़ी – को कमज़ोर करती हैं। इनके लागू हो जाने से ठेका मज़दूरी, असुरक्षित काम, लंबी कार्य अवधि और मनमाने ढंग से छँटनी व लॉकआउट को बढ़ावा मिलेगा, जिससे छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के श्रमिकों की स्थिति और बदतर होगी।

ज्ञापन में मांग की गई कि:
• छत्तीसगढ़ राज्य सरकार इन चार नए श्रम क़ानूनों को राज्य में लागू न करे और विधानसभा के माध्यम से इनके खिलाफ स्पष्ट प्रस्ताव पारित करे।
• राज्य में कार्यरत औद्योगिक, खनन, निर्माण, सेवा, परिवहन, कृषि व अन्य क्षेत्रों के सभी श्रमिकों के लिए पुराने श्रम सुरक्षा प्रावधानों एवं मज़दूर हितैषी नियमों को बरकरार रखा जाए।
• ठेका और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा (ईएसआई, पीएफ आदि), स्वास्थ्य व सुरक्षा प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए और निरीक्षण व्यवस्था मज़बूत की जाए।
• श्रमिक संगठनों से बातचीत किए बिना श्रम संबंधी किसी भी नीति या क़ानून में बदलाव न किया जाए और ट्रेड यूनियनों के साथ वैधानिक त्रिपक्षीय संवाद बहाल किया जाए।

मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें श्रमिकों की इन बुनियादी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेतीं, तो छत्तीसगढ़ भर में मज़दूरों के बीच व्यापक आंदोलन, हड़ताल और जन-अभियान चलाए जाएंगे। संगठन ने सभी ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों, छात्र-युवा व महिला संगठनों से अपील की कि वे इन श्रम क़ानूनों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष तेज करें।
आज के कार्यक्रम में मुख्य रूप सवक्ताओं ने संबोधित किया और चारों श्रम क़ानूनों के प्रमुख प्रावधानों तथा उनके मज़दूर-विरोधी प्रभावों की जानकारी देते हुए मज़दूरों से संगठित रहने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। अंत में नारेबाज़ी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और प्रतिनिधि मंडल ने श्रम आयुक्त (दुर्ग) को ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम मे प्रमुख रूप से भुवन साहु मोहम्मद अली संतोष यादव प्रगतिशील सीमेंट श्रमिक संघ,कल्याण पटेल,लक्षमण,नकुल प्रगतिशील युवा संगठन, निरा दसमत महीला मुक्ति मोर्चा,मेहनतकश आवास अधीकार संघ संजना भावना,जि इंसरात्तमा,के बाल्लमा,वाय शुशीला,लाखन,ब्रम्हा, चंचला दीप,निलेंद्री,व्यास दीप,रायपुर से भागिरथी,नकुल साहु,बसंती,रोशनी,तुलसी,
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन संदीप,जे पी सिमेंट से बंधन सोनी,मजदूर कार्यकर्ता समिति से कलादास डेहरिया महेश साहु सहित सैकडो मजदूर उपस्थित रहे ।

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